सहारनपुर के देवबंद के बढ़ेडी खुर्द गांव की आजादी के 69 साल बाद हालत बदतर है। बिजली, जो मूलभूत सुविधाओं में गिनी जाती है, इस गांव में नहीं है।
न जाने कितनी योजनाएं आई और गईं, लेकिन इस गांव में विद्युतीकरण नहीं हो पाया। कुछ लोगों ने पड़ोसी गांव की लाइन के खंभों से 250 से 300 मीटर लंबे केबिल डालकर अपने घरों तक बिजली की कामचलाऊ व्यवस्था कर रखी है।
अधिकारी और जनप्रतिनिधि भी आज तक ग्रामीणों को इस समस्या से निजात नहीं दिला पाए हैं। देवबंद से करीब 10 किमी दूर यह गांव दिवंगत राज्यमंत्री राजेंद्र सिंह राणा के पैतृक गांव भायला के समीप है।
लगभग एक हजार की आबादी वाला यह गांव वर्ष 2015 में लोहिया ग्राम में चयनित हुआ था। सैनी बाहुल्य इस गांव की सबसे बड़ी समस्या बिजली की है। यहां आज तक भी विद्युतीकरण नहीं हो पाया है।
पूरे गांव में कहीं भी कोई बिजली का खंभा नजर नहीं आता है। जबकि, ग्रामीणों की माने तो 65 लोगों ने बिजली के कनेक्शन भी मंजूर करवा रखे हैं और बिजली के बिलों का भुगतान भी कर रहे हैं। कुछ लोगों ने भायला के जंगल में ट्यूबवेलों के खंभों से 250 से 300 मीटर लंबे केबिल डालकर बिजली की व्यवस्था कर रखी है।
लेकिन, दिक्कत यह है कि दूसरे गांव वाले उनकी केबिल उतारकर फेंक देते हैं। ग्राम प्रधान नर सिंह बताते हैं कि कैबिनेट मंत्री साहब सिंह सैनी, सांसद राघव लखनपाल शर्मा, डीएम, सीडीओ, अधिशासी अभियंता आदि से वह विद्युतीकरण के लिए फरियाद कर चुके हैं,
लेकिन आश्वासन के सिवाए कुछ नहीं मिला है। उन्होंने बताया कि तत्कालीन सीडीओ मोनिका रानी ने तो उनसे राजीव गांधी ग्रामीण विद्युतीकरण योजना के अंतर्गत गांव में विद्युतीकरण कराने का आश्वासन भी दिलाया था।