सहारनपुर। इसे परीक्षक की लापरवाही कहें या फिर मानवीय चूक, कारण कोई भी हो सकता है, लेकिन एक परीक्षार्थी का भविष्य दांव पर लग गया था। हालांकि ऐनवक्त पर मामला पकड़ में आया और गलती को सुधारा गया।
यूपी बोर्ड के मूल्यांकन में परीक्षक ने कॉपी में 65 नंबर दिए और ओएमआर में 17 नंबर दर्ज कर दिए। मूल्यांकन का ऑडिट यानी अंकेक्षण हुआ तो मामला पकड़ा। ऐसा मामला किसी एक मूल्यांकन केंद्र पर नहीं, बल्कि लगभग सभी केंद्रों पर सामने आ रहे हैं।
जनपद में यूपी बोर्ड की कॉपियों के मूल्यांकन के लिए पांच केंद्र बनाए गए हैं, जिन पर दसवीं और 12वीं की 3.30 लाख से अधिक कॉपियां जांची जा रही हैं। मूल्यांकन का कार्य लगभग पूरा हो चुका है। अब उप प्रधान परीक्षकों (प्रधानाचार्यों) के द्वारा मूल्यांकन का ऑडिट किया जा रहा है। एक केंद्र पर कई परीक्षार्थियों के नंबरों को दर्ज करने में लापरवाही सामने आई है। विभागीय सूत्रों ने बताया कि कॉपी में नंबर कुछ हैं और ओएमआर में कुछ दर्ज कर दिए गए हैं। यदि ऑडिट में मामला पकड़ में न आता तो इससे संबंधित विद्यार्थी फेल हो सकता था।
बता दें कि ऑडिट या अंकेक्षण मूल्यांकन के बाद की जाने वाली एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया है, जिसका उद्देश्य अंकों की त्रुटियों को सुधारना और मूल्यांकन की शुचिता बनाए रखना है। इसके तहत जांचकर्ता प्रतिदिन मूल्यांकित कॉपियों में से रेंडम आधार पर कुछ प्रतिशत कॉपियों की पुन: जांच करते हैं। इसमें यह देखा जाता है कि सभी प्रश्नों के अंक सही से जुड़े हैं या नहीं, साथ ही कोई प्रश्न बिना जांचे तो नहीं रह गया है।