सहारनपुर। जिले में बिजली व्यवस्था मजबूत करने के नाम पर दो साल में 100 करोड़ रुपये से भी अधिक खर्च कर दिए गए, लेकिन बिजली की लाइनें एवं ट्रांसफार्मर हवा के झोंके एवं बरसात तक सहन नहीं कर सके। एक ही बारिश ने जिले की बिजली व्यवस्था को ध्वस्त कर डाला। दो दिन में भी बिजली व्यवस्था पटरी पर नहीं आ सकी।
सहारनपुर में विद्युत निगम के इन्फ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने के लिए दो साल में करोड़ों रुपये से विभिन्न योजनाओं में खर्च कर दिए गए। पिछले तीन चार सालों में आरएपीडीआरपी एवं एआरएपीडीआरपी योजनाओं के तहत जिले को लगभग दो सौ करोड़ से अधिक बजट दिया गया। दावा किया गया कि अधिकांश लाइनें नई एवं मजबूत डाल दी गईं हैं। बिजलीघरों को भी संरचनात्मक रूप से मजबूती दी गई है। न तो जल्दी लाइनें ही टूटेंगी और न ही ट्रांसफार्मर ही फुंकेंगे। यही नहीं शहर से लेकर देहात तक के सभी बिजलीघरों में पिछले साल कुछ न कुछ मरम्मत कराई गई। नई लाइनें भी खींची गईं, लेकिन सोमवार की शाम आई आंधी और रात में हुई बारिश ने जिले की बिजली व्यवस्था को चौपट कर डाला। सोमवार की पूरी रात बिजली नहीं आ सकी। शहर में मंगलवार दोपहर तक बिजली सप्लाई सुचारु हो सकी थी, लेकिन देहात क्षेत्र में मंगलवार रात तक भी बिजली सप्लाई नहीं मिल सकी। देवबंद, अंबेहटा, बिहारीगढ़, गागलहेड़ी क्षेत्र के कई गांवों में बुधवार सुबह तक आपूर्ति सुचारु नहीं हो सकी।
मौसम से प्रभावित होती है आपूर्ति
अधीक्षण अभियंता रविंद्र कुमार गुप्ता का कहना है कि बिजली व्यवस्था काफी मजबूत हुई है। लोड अधिक होने से ट्रांसफार्मर नहीं फुंक रहे, लाइनें नहीं टूट रहीं, बिजलीघरों को बंद नहीं करना पड़ रहा है। बिजली की सप्लाई काफी अधिक हो गई है। मौसम खराब होगा तो कुछ दिक्कतें आनी स्वाभाविक है। कहीं टहनियां लाइनों पर गिरतीं हैं, तो कहीं पेड़ गिर जाता है, जिससे लाइनें एवं खंभे टूट जाते हैं। पानी का कनेक्टर हो जाने से लाइनों में छोटे-छोटे फाल्ट आ जाते हैं, ट्रांसफार्मरों का अधिक से अधिक फ्यूज उड़ सकता है। इन फाल्टों को तुरंत ठीक कराया जा सकता है। सिर्फ खंभे टूटने की स्थिति में ही समय अधिक लगता है।