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नियमों को ताक पर हो रही है कीटनाशकों की बिक्री

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सरसावा (सहारनपुर)। फसलों में छिड़काव करने के लिए जहरीली कीटनाशक दवाओं की बिक्री नियमों को ताक पर रखकर खुलेआम की जा रही हैं। वहीं कार्रवाई के बावजूद विभाग के प्रयास नाकाफी साबित हो रहे हैं। बीते दिनों एक दुकान से कीटनाशक खरीदकर नगर के एक युवक द्वारा आत्महत्या करने का मामला सामने आ चुका है, इसके बावजूद इसकी बिक्री पर रोक नहीं लग पा रही है।
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सरसावा में दर्जनों ऐसी दुकानें हैं जहां फसलों को कीटों एवं रोगों से बचाने के लिए कीटनाशक दवाइयां बेची जाती हैं। 20 दुकानों को लाइसेंस भी जारी किए गए हैं। जिला कृषि रक्षा अधिकारी शिप्रा शर्मा ने बताया कि फसलों में डाली जाने वाली दवाएं हानिकारक होती हैं, इसीलिए इनके कुप्रभावों से बचने के लिए विभाग के द्वारा कीटनाशक दवा बेचने वाली दुकानों को इस हिदायत के साथ लाइसेंस जारी किए जाते हैं कि वे नियमों का पालन करेंगे। जिसमें दवा का स्टाक रजिस्टर रखना, खरीदने वाले को बिल अवश्य देना, कीटनाशक लेने वाले का पूरा ब्योरा रखना साथ ही दवाओं को सामान्य ग्राहकों से दूर सुरक्षित स्थानों पर रखना है। ये भी ध्यान रखना आवश्यक है कि कीटनाशक दवा लेने वाले के पास उस दवा के अनुपात में फसल है भी या नहीं। लेकिन वास्तविकता ये है कि अब तक नियमों के पालन कराने में न तो विभाग की कोई दिलचस्पी दिखाई दी और न ही दुकानदारों की। वास्तविकता ये है नगर में कीटनाशक बेचने वाले किसी भी दुकानदार के पास कोई रिकार्ड ही नहीं है कि उसने किसको कितनी कीटनाशक दवा बेची है। एक हकीकत यह भी है कि किसान ही नहीं कोई भी इन दुकानदारों से जहरीली कीटनाशक दवा खरीद सकता है। बीते दिनों नगर के एक व्यक्ति ने ऐसी ही एक दुकान से जहरीली दवा खरीदकर खुदकुशी कर ली थी। शिप्रा शर्मा ने बताया कि लाइसेंसधारी दुकानदार को विभाग द्वारा जारी लाइसेंस पर बेची जानी कीटनाशक दवा का नाम उसकी निर्माता कंपनियों तथा डिस्ट्रीब्यूटरों की मंजूरी अंकित कराना अति आवश्यक है ऐसा नहीं है कि लाइसेंस मिला और किसी भी कंपनी की कोई भी कीटनाशक दवा बेचनी आरंभ कर दी। ये नियम का घोर उल्लंघन है। ऐसा करने के परिणाम स्वरूप दुकानदार का लाइसेंस निरस्त कर एफआईआर कराने का प्रावधान है। जिसमें आरोप सही पाए जाने पर सजा भी हो सकती है।
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क्या नियम हैं लाइसेंस जारी करने के लिए
1- पेस्टीसाइड बेचने का लाइसेंस लेने कृषि विषय से ग्रेजुएट होना जरूरी है।
2- लाइसेंस मांगने वाले की उम्र भी 21 वर्ष या उससे अधिक होनी चाहिए।
3- जिस स्थान पर कीटनाशक की दुकान करनी है, उसकी सीमा से मिलते भवनों का पूरा ब्योरा दाखिल करना होता है। साथ ही आबादी के बीच में स्थित दुकानों को लाइसेंस देने में सावधानी बरती जाती है।
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4- जिस स्थान के लिए आवेदन किया है कीटनाशक उसी स्थान पर रखा जाना चाहिए, अन्यत्र नहीं।
5- कीटनाशक रखने का स्थान सीलन तथा धूप से दूर होना चाहिए। क्योंकि इससे दवा में क्रिया होने के बाद कीटनाशक में गैस बनने की संभावना बढ़ जाती है जो आमजन के स्वास्थ्य के लिए खतरनाक है।
6- कीटनाशक बेचने वाली दुकानों पर बालश्रम सख्ती से प्रतिबंधित हैं।
7- प्रतिबंधित कीटनाशक दवा पकड़े जाने पर जुर्माने के साथ सजा का भी प्रावधान है।
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-- नियमों की हो रही अनदेखी
कीटनाशक दवा बेचने वाले कुछ दुकानदार किसी भी नियम का पालन नहीं करते हैं। दुकानों पर वर्षों पहले कृषि के लिए प्रतिबंधित की जा चुकी कीटनाशक दवा सल्फास की गोली जो एल्यूमीनियम से निर्मित ट्यूब की शक्ल की शीशी में 20 टेबलेट आती हैं, मोनोक्रोटोफॉस, इंडोसल्फान, पारद टिकड़ी आदि आसानी से दुकानों पर उपलब्ध हैं। उच्चतम न्यायालय ने 13 मई 2011 को दिए एक अंतरिम आदेश में इंडोसल्फान के उत्पादन, प्रयोग तथा बिक्री को अग्रिम आदेशों तक निषिद्ध किया है। बावजूद इसके और भी अनेकों ऐसे कीटनाशक है जो खुलेआम बेचे जा रहे हैं।
पूरे जिले में स्थापित कीटनाशक दवा की दुकानों का निरीक्षण क्रमवार किया जा रहा है तथा नियमों का पालन नहीं करने वालों पर नोटिस देने के अलावा विभागीय कार्रवाई भी की जा रही है। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि जिस दुकान पर प्रतिबंधित दवा मिलेगी उसके विरुद्ध बिना दबाव के आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
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शिप्रा शर्मा, जिला कृषि अधिकारी
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