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तोतापरी और कश्मीरी बकरे की सबसे ज्यादा मांग

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सहारनपुर। ईद-उल-अजहा पर कुर्बानी का अत्यधिक महत्व है। बकरा मार्केट में जमकर बकरों की खरीदारी हो रही है। तोतापरी और कश्मीरी बकरे की सबसे ज्यादा मांग है। राजस्थान, पंजाब, हरियाणा और कश्मीर के अलग-अलग नस्लों के बकरे बाजार में आए हुए हैं।
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22 अगस्त को ईद-उल-अजहा मनाया जाएगा। कंबोह के पुल स्थित बकरा मार्केट में पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और कश्मीर के व्यापारी अलग-अलग नस्लों के बकरे लेकर आए हुए हैं, जिन्हें कुर्बानी के लिए खरीदने के लिए भारी संख्या में मुस्लिम समाज के लोग पहुंच रहे हैं। इनमें सबसे ज्यादा मांग तोतापरी और कश्मीरी बकरे की है। पशु कारोबारी मोहम्मद कलीम कुरैशी ने बताया कि उनके पास तोतापरी बकरा है, जिसका वजन 160 किलो है। यह पूरे दिन में पांच से दस लीटर दूध पीता है, दो सौ रुपये के गूलर के पत्ते, तीन सौ रुपये फल और दो किलो चना खाता है। वजन के हिसाब से तोतापरी बकरे की कीमत एक से डेढ़ लाख रुपये तक है। कुर्बानी के लिए तोतापरी और कश्मीरी बकरे को लोग पसंद करते हैं। इस बकरे की कीमत 50 हजार से एक लाख रुपये तक है। इस समय उनके पास तोतापरी और कश्मीरी सहित करीब 80 बकरे बिक्री के लिए आए हैं। पशु कारोबारी मोहम्मद राशिद अनवर का कहना है कि अभी तक सबसे महंगा बकरा एक लाख रुपये बिका है। ईद-उल-अजहा के एक-दो दिन बाद तक बकरों के दाम घटते और बढ़ते रहेंगे। वहीं, कमेला कॉलोनी में भी पशु मंडी लगी है। यहां पर भैंसों की खरीद-फरोख्त हो रही है। पशु व्यापारी शाहिद खान का कहना है कि अभी तक मंडी में करीब सात हजार से अधिक भैंसों बिक्री लिए आ चुकी है। लोग बजट के हिसाब से अलग-अलग पशुओं की खरीददारी कर रहे हैं। पशु कारोबारी मोहम्मद आसिफ ने बताया कि कुर्बानी के लिए बाजार में अनेक नस्लों बकरे आए हुए हैं। इनमें सल्लू, मल्लू, कश्मीरी, मुंडा, सिंग वाला, तोतापरी, अमृतसरी, कस्सी बकरे शामिल है। इनकी कीमत डेढ़ से तीन लाख रुपये तक है।
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