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निगम की फाइलों में अटके 474 करोड़ के विकास कार्य

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सहारनपुर। नगर निगम बोर्ड की बैठक में शहर के विकास के लिए 478 करोड़ रुपये का भारी भरकम बजट पास हुआ था। उम्मीद थी कि स्मार्ट सिटी योजना के साथ-साथ इतने बड़े बजट से शहर के हालात बदलेंगे। मगर हालात बदलना तो दूर की बात तीन महीने में ज्यादातर प्रस्तावित कार्यों पर अभी तक काम भी शुरू नहीं हो सका है। कहना गलत न होगा, कि विकास कार्य फाइल से बाहर नहीं निकल सके हैं।
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24 फरवरी को मेयर संजीव वालिया के कार्यालय में कार्यकारिणी समिति की बैठक हुई थी, जिसमें शहर के विकास के लिए 472 करोड़, 11 लाख 98 हजार रुपये का बजट पास किया गया था। इसके बाद मार्च में सर्किट हाउस में हुई नगर निगम बोर्ड की बैठक में आंशिक संशोधन के बाद 477 करोड़ 84 लाख 55 हजार रुपये के बजट पर मुहर लगी थी। बैठक में कुल 23 प्रस्ताव रखे गए थे, जिनमें से 21 प्रस्तावों को आंशिक संशोधन के बाद सर्वसम्मति से पास कर दिया गया था। जिन प्रस्तावों को पास किया गया था उनमें सड़कों से अतिक्रमण हटवाकर उनके चौड़ीकरण, सड़कों पर डिवाइडर और फुटपाथ बनाने समेत अनेक कार्य शामिल थे। मगर हैरत की बात यह है कि ज्यादातर प्रस्तावित कार्य अभी तक फाइलों से बाहर नहीं आ सके हैं। अधिकारियों में विकास कार्यों को लेकर इच्छा शक्ति की कमी होना इसके लिए जिम्मेदार माना जा रहा है।
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प्रस्तावित कार्य, जिनपर शुरू नहीं हुआ काम
-गांव सांवलपुर नवादा में ग्राम सभा की जमीन को कान्हा उपवन के रूप में विकसित करना।
-गांधी पार्क के पास शौचालय के स्थान पर दुकानों का निर्माण करना।
-घंटा घर चौक से श्रीराम चौक तक आरसीसी डिवाइडर बनाना।
-घंटाघर चौक से श्रीराम चौक तक दोनों ओर फुटपाथ बनाना।
-पथ प्रकाश व्यवस्था को सुदृढ़ बनाना, नए मिस्त्री और हेल्पर रखना।
-शहर की नई कॉलोनियों को विकसित कर बुनियादी सुविधाएं देना।
-जैन मंदिर के पास गोल कोठी का नाम बदलकर भगवान महावीर चौक रखना।
-मातागढ़ में पुरानी पुलिया को तोड़कर नई पुलिया का निर्माण आदि।
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बजट का अभाव भी बड़ी चुनौती
नगर निगम बोर्ड की बैठक में प्रस्तावित कई कार्य अभी तक शुरू नहीं होने की एक वजह बजट का अभाव भी माना जा रहा है। बता दें कि गृह, जल और सीवर कर नगर निगम की इनकम का सबसे बड़ा श्रोत है। जानकर हैरानी होगी कि ऑनलाइन व्यवस्था में तकनीकी खराबी की वजह से करीब दो महीने तक नगर निगम के खाते में टैक्स का एक रुपया तक जमा नहीं हुआ। अब करीब दस दिन से टैक्स जमा होना शुरू हुआ है। गत वर्षों में भी टैक्स वसूली लक्ष्य के सापेक्ष 20 से 30 फीसदी ही रही है।
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कार्यों में लापरवाही उजागर
नगर निगम बोर्ड की बैठक में प्रस्तावित कुछ कार्यों को शुरू किया गया है। मगर कार्यों के निर्माण की गति बेहद धीमी है। घंटा घर चौक से कोर्ट रोड ओवरब्रिज तक बनाया जाने वाला फुटपाथ इसका बेहतर उदाहरण है। पिछले करीब दो महीने से फुटपाथ का कार्य 20 फीसदी भी पूरा नहीं हो सका है। दुकानों के सामने नाला खुदा पड़ा होने की वजह से व्यापारी और स्थानीय लोग नाराज हैं। नगर निगम संबंधित ठेकेदार पर 50 हजार रुपये का जुर्माना लगा चुका है। दूसरा कार्य दिल्ली रोड पर हसनपुर चुंगी तक फुटपाथ और डिवाइडर बनाने का है। यहां भी कार्य की गति धीमी होने की वजह से ठेकेदार पर 50 हजार रुपये का जुर्माना लग चुका है। फुटपाथ के लिए केवल अतिक्रमण हटाया गया है। डिवाइडर भी मुश्किल से 15 प्रतिशत ही बन सका है।
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नगर निगम के पास बजट का कोई अभाव नहीं है। सौ कार्य ऐसे हैं, जिन पर कोई टेंडर नहीं आया है। ऐसे में री-टेंडर किया गया है। हम सोच रहे हैं कि बाहर के ठेकेदारों को भी शामिल किया जाए, जिससे और बेहतर काम करने वाले सामने आ सकें। सभी प्रस्तावित कार्यों पर जल्द अमल शुरू हो जाएगा।
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ज्ञानेंद्र सिंह, नगरायुक्त।
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