सहारनपुर। माह-ए-रमजान गुनाहों से तौबा करने का बेहतरीन मौका है। ये महीना सब्र का है और सब्र का बदला जन्नत है। रोजा रखकर कर इंसान अपने अंदर तकवे पर चलने का अभ्यास करता है। तकवे की दौलत से इंसान खुद बुराई से बचने लगता है।
ये बातें रोजदारों के जारी की गई हेल्पलाइन पर जमीयत दावतुल मुसलीमीन के संरक्षक व इमाम कारी सय्यद इसहाक गोरा ने रोजेदारों को बताई। बृहस्पतिवार को रोजेदारों ने रोजा, जकात, तरावीह, ऐतकाफ से संबंधित सवाल पूछे। सभी सवालों का जवाब शरीयत के हिसाब से दिया गया।
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सवाल- कस्बा खतौली निवासी अजीज सिद्दीकी ने पूछा कि मेरे मोहल्ले के नौजवान युवक रोजे की हालत में मोबाइल फोन पर घंटों वीडियो देखते हैं और छोटी-छोटी बात पर गाली गलौज करने लग जाते हैं। ऐसी सूरत में शरीयत क्या कहती है।
जवाब- हदीस में बताया गया कि पैगंबर मोहम्मद साहब ने फरमाया कि जो व्यक्ति रोजे में बुरी बात कहता है। अल्लाह को उसके भूखे-प्यासे रहने की परवाह नहीं। सिर्फ खाने-पीना छोड़ देने का का नाम रोजा नहीं है बल्कि बेहूदा कामों और बातों से बचा जाए।
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सवाल- जनपद मेरठ के इंचौली निवासी अरशद खान ने पूछा कि हमारी बस्ती की मस्जिद में ऊपर और नीचे की मंजिल पर अलग-अलग कुरान-ए-पाक तरावीह में सुनाया जा रहा है। लोगों को आपत्ति है कि ये सही नहीं हो रहा है।
जवाब-- एक मस्जिद में अलग-अलग नमाज-ए-तरावीह पढ़ा सकते हैं। शर्त यह है कि एक-दूसरे की आवाज ना टकराए। बेहतर तरीका है कि तमाम लोग एक ही इमाम के पीछे नमाज-ए-तरावीह अदा करें।
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रोजेदार ऐसे पूछ सकते हैं सवाल
सहारनपुर। इमाम कारी सय्यद इसहाक गोरा ने बताया कि रोजेदार हेल्पलाइन पर फोन कॉल कर और ईमेल के जरिए सवाल पूछ सकते हैं। हेल्प लाइन नंबर 9897399207, 9557757705, 9319462031, 9319309995 हैं। दोपहर 12:00 बजे से शाम 4:00 बजे तक सवालों के जवाब दिए जाएंगे। चार बजे के बाद रोजेदार ई-मेल आईडी ishaqgora@gmail.com और helplineishaqgora@gmail.com पर सवाल पूछ सकते हैं।