शहर में आज तक संकेत नहीं दे पाए ट्रैफिक सिग्नल
सहारनपुर। शहर में बेहाल यातायात व्यवस्था में सुधार करने के लिए प्रमुख चौराहों पर तीन साल पूर्व लगाई गईं ट्रैफिक लाइट शोपीस बनकर रह गई हैं। लाखों रुपये खर्च कर शहर के छह चौराहों पर लगाई गई ट्रैफिक लाइटें एक दिन भी लोगों को संकेत नहीं दे पाईं। न तो इन ट्रैफिक लाइटों का नियंत्रण हो सका और न ही संचालन हो सका। अब इन लाइटों को फिर से शुरू कराए जाने के लिए अधिकारी मंथन कर रहे हैं।
सहारनपुर की बिगड़ती यातायात व्यवस्था को नियंत्रित करने के लिए प्रमुख चौराहों जनकपुरी चौक, घंटाघर, कलक्ट्रेट तिराहा, कचहरी तिराहा, अस्पताल चौक पर वर्ष 2015 में ट्रैफिक लाइटें लगाई गई थी। पुलिस अधिकारियों ने ट्रैफिक लाइटें तो लगवा दीं, लेकिन उनका संचालन नहीं कराया जा सका। हर साल इन लाइटों को ठीक कराने के नाम पर खर्च किया जाता रहा। लेकिन ये ट्रैफिक लाइटें यातायात संकेत नहीं दे सकीं।
इस माह के शुरू में अधिकारियों की बैठक कर मंडलायुक्त दीपक अग्रवाल ने शहर में लग रहे जाम और बिगड़ रही यातायात व्यवस्था को सुधारने के लिए ट्रैफिक लाइटों को ठीक कर उनका सही प्रकार संचालन कराने के निर्देश दिए थे। एक सप्ताह में ही ट्रैफिक लाइटें शुरू कराई जानी थीं। जिसके चलते यातायात पुलिस ने पिछले सप्ताह ट्रैफिक लाइटों का संचालन शुरू कराया। दो दिन तक यातायात को ट्रैफिक लाइट से नियंत्रित करने का प्रयास किया गया। लेकिन ट्रैफिक लाइटें ही नियंत्रण में नहीं हो सकीं, यातायात व्यवस्था तो बिगड़ती ही गई। जिस कारण इन्हें फिर से बंद कर दिया गया। अब अधिकारी इन लाइटों को लेकर फिर से मंथन कर रहे हैं।
यातायात पुलिस अधीक्षक विनीत भटनागर का कहना है कि ट्रैफिक लाइट ठीक से काम नहीं कर पा रहीं हैं। इन्हें ठीक कराकर फिर से इनका संचालन कराया जाएगा। जिससे यातायात व्यवस्था ठीक हो सके।