देवबंद (सहारनपुर)। बांग्लादेशी आतंकी अब्दुल्ला के गिरफ्त में आने के बाद फर्जी पासपोर्ट का खुलासा अधिकारियों के लिए जी का जंजाल बना हुआ है। इस मामले में अधिकारियों को जितनी गंभीरता दिखानी चाहिए थी, वो नहीं दिख रही है।
देवबंद से बांग्लादेशी आतंकी अब्दुल्ला का फर्जी पासपोर्ट बनाने के मामले में एसएसपी के आदेश पर भले ही मुंशी सिपाही सतीश के खिलाफ धारा 420 के अंतर्गत रिपोर्ट दर्ज कर ली गई हो। लेकिन इस गोरखधंधे के पीछे केवल एक सिपाही ही है यह बात किसी को हजम नहीं हो रही है। लखनऊ एटीएस देवबंद पहुंचकर मामले से जुड़े लोगों को पकड़कर ले जाती है और पुलिस को इसकी भनक तक नहीं लगती। ऐसा एक बार नहीं बल्कि कई बार हुआ है। मामला गंभीर होने के बाद भी कार्रवाई का आलम क्या है इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि कई माह पूर्व अधिकारियों ने देवबंद क्षेत्र में करीब तीन हजार पासपोर्टों की पुन: जांच किए जाने के आदेश दिए थे, लेकिन हैरत की बात यह है कि इतनी बड़ी तादाद में अभी तक कुछेक पासपोर्टों की जांच ही हो पाई है। वहीं, पिछले करीब डेढ़ वर्ष पुलिस अधिकारियों के आदेश पर स्थानीय अभिसूचना इकाई से पासपोर्टों की जांच के लिए होने वाले भौतिक सत्यापन की कार्रवाई को बंद कर दिया गया था। फर्जी पासपोर्ट का खुलासा हुआ तो एक माह पूर्व इस कार्रवाई को पुन: शुरू कर दिया गया। उधर, सूत्रों का कहना है कि खुफिया इकाई के अधिकारियों पर दूसरे कार्यों का बोझ इतना डाला हुआ है कि वो पासपोर्टों की पुन: जांच के लिए समय ही नहीं निकाल पा रहे हैं।