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जर्जर सड़कें, खुले मैनहोल और गंदगी नहीं बनी मुद्दा

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पार्षद और सभासद प्रत्याशी तक जीएसटी जैसे राष्ट्रीय मुद्दों पर मांग रहे वोट
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फोटो संख्या: 8 की सीरीज
अमर उजाला ब्यूरो
सहारनपुर। जर्जर सड़कें, खुले सीवर के मैनहोल, जगह-जगह गंदगी के ढेर और हाउस टैक्स में वृद्धि शहरवासियों की प्रमुख समस्याएं हैं। ज्यादातर राजनीतिक दलों और प्रत्याशियों ने इन ज्वलंत जन समस्याओं को अपना चुनावी मुद्दा नहीं बनाया है। मेयर और चेयरमैन पद प्रत्याशियों के साथ ही पार्षद और सभासद प्रत्याशी तक जीएसटी और नोटबंदी जैसे राष्ट्रीय मुद्दों को आगे कर वोट मांग रहे हैं। सहारनपुर को नगर निगम बने करीब नौ साल बीत चुके हैं। नगर निगम के अधिकारी आज तक कचरा प्रबंधन की व्यवस्था नहीं कर सके हैं। शहर से प्रतिदिन निकलने वाला करीब 200 टन कचरा शहर के लिए मुसीबत बनता जा रहा है। नगर निगम शहर से कचरा उठाकर शहर के बाहर फेंक रहा है। सीवर की बात करें तो 70 फीसदी से अधिक शहरी क्षेत्र में सीवर लाइन नहीं हैं। जहां सीवर है वहां भी मैनहोल के ढक्कन न होने की वजह से खुले पड़े हैं। पिछले करीब डेढ़ साल से सड़कों की मरम्मत तक नहीं हो पा रही है, जिसकी वजह से शहर की तमाम छोटी और बड़ी सड़कें जर्जर हो चुकी हैं। नगर निगम समय-समय पर गहरे गड्ढों को मिट्टी से भरने की नाकाम कोशिश करता रहा है। नगर निगम ने करीब दो साल पहले हाउस टैक्स में 10 प्रतिशत तक की वृद्धि की है, जिसे लेकर आमजन परेशान हैं। स्ट्रीट लाइट और पेयजल की समस्याएं अलग से हैं। मगर हैरत की बात यह है कि किसी भी दल के चुनावी एजेंडे में जनता से सीधे जुड़ी यह समस्याएं नहीं हैं। सत्ताधारी दल केंद्र और प्रदेश सरकार के भ्रष्टाचार के खिलाफ मुहिम, नोटबंदी और जीएसटी को जन और राष्ट्रहित में बताकर वोट बटोरने की कोशिश में हैं तो तमाम विपक्षी दल नोटबंदी और जीएसटी को जनविरोधी साबित करने की कोशिश कर वोट बटोरना चाहते हैं। नगर निगम के साथ ही नगर पंचायतों और नगर पालिका परिषदों में भी प्रत्याशियों की यही स्थिति है।
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चुनाव को सांप्रदायिक रंग देने की कोशिश
मेयर सीट से लेकर चेयरमैन और पार्षद व सभासद की अनेक सीटों पर प्रत्याशी के साथ ही राजनीतिक दल भी जनता का ध्यान मुद्दों से भटकाकर सांप्रदायिक रंग देने की कोशिश में हैं। इसकी झलक अनेक जगहों पर दिखने भी लगी है। पार्षद और सभासद सीटों की बात करें तो ज्यादातर जगहों पर वोट चेहरे को मिलना है, जिसमें पार्टियां कमजोर नजर आ रही हैं, जबकि मेयर और चेयरमैन सीटों पर पार्टी और सांप्रदायिकता का रंग हावी है।
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