करोड़ों रुपये की सरकारी जमीनों पर कुंडली मारे बैठे भूमाफिया
सहारनपुर। सूबे में योगी के नेतृत्व वाली सरकार ने सरकारी जमीनों को कब्जामुक्त कराने के आदेश जारी किए हुए हैं। इसके लिए एंटी भूमाफिया स्क्वायड बनाकर काम किया जा रहा है। मगर सहारनपुर में योगी के आदेशों का कोई असर नजर आ रहा है। कई जगहों पर अधिकारियों को यह तक नहीं पता है कि सरकार की जमीनें कहां-कहां हैं। नगर निगम की हालत सबसे खराब है, जिसकी करोड़ों रुपये की जमीनों पर वर्षों से स्थाई और अस्थाई कब्जे हैं।
शहर में नगर निगम की जमीनें जगह-जगह हैं, जिनमें से अधिकतर पर लोगों का कब्जा है। राकेश टाकिज के पीछे नगर निगम की करीब दो हजार गज जमीन पड़ी है। यहां नगर निगम का ट्यूबवेल भी लगा है। मगर जमीन की बाउंड्री नहीं होने की वजह से स्थानीय लोगों ने इस पर कब्जा किया हुआ है। लोगों ने कई बार कब्जे का यह मामला उठाते हुए शिकायतें की, लेकिन नगर निगम ने आज तक इस जमीन को कब्जामुक्त कराने को कदम नहीं उठाया है। खाताखड़ी में नगर निगम के क्वार्टरों पर कब्जा होने की शिकायत कई बार हो चुकी है। मगर कब्जाधारी निगम प्रशासन पर भारी पड़ते नजर आए हैं। वर्ष 2009 में 32 गांवों को नगर में शामिल करने के बाद इसका दायरा और बढ़ गया है। इन 32 गांवों में से लगभग प्रत्येक गांव में सरकारी जमीनों और तालाबों पर लोगों ने कब्जा किया हुआ है, जिसे हटाए जाने की जरूरत है। उधर, नगरायुक्त ओपी वर्मा ने बताया कि वह खुद मौके पर जाकर निगम की जमीनों को देख रहे हैं। जितनी भी जमीनों पर स्थाई या अस्थाई कब्जे हैं उन्हें हटाने के लिए सात दिन का समय दिया गया है। यदि लोग खुद जमीन खाली नहीं करते हैं तो निगम सख्ती से काम करेगा।
निगम की कार्यप्रणाली पर सवाल
जमीनों को कब्जामुक्त कराने में नगर निगम की कार्यप्रणाली पर सवाल उठते रहे हैं। तीन साल पहले मल्हीपुरा रोड पर नगर निगम की करोड़ों की जमीन पर बाउंड्री वॉल बनाने का मामला सामने आया था। नगर निगम के अधिकारी जमीन को कब्जामुक्त कराने पहुंचे थे, मगर नाकाम लौटे थे। प्रकरण में कोतवाली सदर में एफआईआर दर्ज कराई गई थी, मगर सत्ता के दबाव में निगम चुप बैठ गया। आरोप है कि अनेक जमीनों पर मिलीभगत से कब्जे कराए जा रहे हैं।