सहारनपुर। बीज बदलाव और गन्ने की अगेती प्रजाति की अधिक बुआई का रिजल्ट सामने आने लगा है। गन्ने की मिठास बढ़ गई है और जनपद की चीनी मिलों की शुगर रिकवरी में लगातार इजाफा हो रहा है। इसमें शरद कालीन एवं वसंत कालीन गन्ने के रकबे में हुई बढ़ोत्तरी का भी खासा योगदान बताया जा रहा है।
गन्ना विभाग द्वारा पिछले कई वर्षों से किसानों को गन्ने की अगेती प्रजातियों की अधिक बुआई और बुआई की ट्रेंच विधि अपनाने के लिए चलाए गए अभियान का रिजल्ट सामने आने लगा है। इसमें किसानों को अनुपयुक्त प्रजातियों के बुआई करने के लिए भी हतोत्साहित किया गया है। जिसके चलते जनपद में अब अनुपयुक्त गन्ना प्रजातियों का रकबा नहीं के बराबर है। साथ ही गन्ने की अगेती प्रजातियों के रकबे में भी खासी बढ़ोत्तरी हुई है। जनपद की अगेती प्रजातियों में करीब 80 प्रतिशत रकबा कोशा 0238 प्रजाति का है। जिसमें शर्करा की मात्रा अन्य प्रजातियों के अपेक्षा अधिक होती है। गन्ना विकास निरीक्षक यशपाल सिंह ने बताया कि पिछले कई वर्षों से गन्ना विभाग ने अभियान चलाकर गन्ने की अनुपयुक्त प्रजातियों की बुआई को बंद कराया। इसके अलावा गन्ना बुआई की ट्रेंच विधि और शरद कालीन एवं वसंत कालीन का रकबा भी बढ़ा है। इस सीजन में पेड़ी और पौधा को मिलाकर जनपद में लगभग 82 हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल में अगेती प्रजातियों का गन्ना है। इस बार भी जिले में करीब छह हजार हेक्टेयर में शरद कालीन गन्ना की बुआई हुई है, जिसमें शत प्रतिशत ट्रेंच विधि का अपनाया गया है।
चीनी मिलों में लगातार शुगर रिकवरी बढ़ रही है। वर्ष 2014-15 में जहां 28 फरवरी तक शुगर की औसत रिकवरी 8.51 प्रतिशत थी, जो इस बार इसी तारीख तक 10.39 फीसदी हो गई है। इसका मुख्य कारण किसानों द्वारा गन्ने की कोसा 0238, कोसा 0118 और कोसा 98014 जैसी अगेती प्रजातियों के क्षेत्रफल में बढ़ोत्तरी और अनुपयुक्त प्रजातियों की बुआई को हतोत्साहित करना है। इसके अलावा शरद कालीन और वसंत कालीन गन्ना बुआई के रकबे में भी वृद्धि हुई है। इसका परिणाम शुगर रिकवरी बढ़ने के रूप में सामने आ रहा है।
- कृष्ण मोहन मणि त्रिपाठी, जिला गन्ना अधिकारी।
शुगर मिलों की औसत शुगर रिकवरी प्रतिशत में
वर्ष------------------शुगर रिकवरी
2014-15------------08.51
2015-16------------09.42
2016-17------------09.29
2017-18------------10.06
2018-19------------10.39
28 फरवरी के गन्ना विभाग के आंकड़ों के अनुसार।