कोर्ट ने रोक हटाई, शस्त्र लाइसेंस आवेदनों की बाढ़ आई
सहारनपुर। कोर्ट की रोक हटने के बाद शस्त्र लाइसेंस के लिए आवेदनों की बाढ़ आ गई है। पुलिस थानों में न सिर्फ फाइल आगे बढ़ाने के लिए चक्कर काट रहे हैं, बल्कि नेताओं की सिफारिशें भी कराई जा रहीं हैं। बीते तीन माह में 400 से अधिक आवेदन फार्म जमा हो चुके हैं, जबकि फाइलों के ढेर पुलिस एवं प्रशासनिक अधिकारियों के कार्यालय में लगे हैं।
फिलहाल सहारनपुर जनपद में 17 हजार से भी अधिक शस्त्र लाइसेंस हैं, जबकि हर माह 100 से अधिक लोग लाइसेंस के लिए फार्म ले जा रहे हैं। कई वर्षों से नए लाइसेंस बनवाए जाने पर कोर्ट की रोक लगी हुई थी। सिर्फ लाइसेंस के नवीनीकरण अथवा वारिस के लाइसेंस का नाम ट्रांसफर कार्य ही हो पा रहा था। रोक हटने के बाद से ही नए लाइसेंस के लिए लोग दौड़ भाग कर रहे हैं। पुलिस कार्यालयों, थानों में लाइसेंस बनवाने के लिए फाइलों का ढेर लग गया है। रोजाना ही औसतन पांच से दस फाइलें पहुंच रहीं हैं। नवंबर से अब तक लाइसेंस के लिए लगभग 400 फार्म जमा कराए जा चुके हैं।
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-- कुछ लोग ही करते हैं व्यवसायिक प्रयोग
असलाह विभाग के अधिकारियों का कहना है कुछ लोगों ने गार्ड की नौकरी के लिए असलाह का लाइसेंस ले रखा है। ये अधिकांश रायफल अथवा बंदूक का ही लाइसेंस लेते हैं। लेकिन इनकी संख्या दो हजार से भी कम है।
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-- सुरक्षा नहीं स्टेटस सिंबल बना लिया है
शस्त्र लाइसेंस रखना स्टेटस सिंबल भी बन गया है। हनक दिखाने के लिए कंधे पर बंदूक अथवा अंटी में पिस्तौल लगाकर रखते हैं। कई लोग तो सिर्फ प्रतिष्ठा के लिए ही असलहा ले रहे हैं। इनमें से अधिकांश असलहों को सिर्फ समारोहों में हर्ष फायरिंग में ही प्रयोग किया जाता है, जबकि हर्ष फायरिंग पर पूर्णत: प्रतिबंध है। वारदात होने पर बदमाशों के खिलाफ शायद ही लाइसेंसी हथियार का प्रयोग किया जाता हो। ऐसे भी परिवार हैं, जहां एक सदस्य के पास पिस्टल, तो दूसरे के पास लाइसेंसी बंदूक है।
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-- बढ़ गई हैं असलाह लाइसेंस मांगने वालों की संख्या
नगर मजिस्ट्रेट पंकज कुमार वर्मा का कहना है कि कुछ समय से लाइसेंस मांगने वालों की संख्या बढ़ गई है। हर माह लाइसेंस के लिए लगभग 100 फार्म जा रहे हैं। फाइलें तैयार कराई जा रहीं हैं। नियमों के अनुसार हर किसी का शस्त्र लाइसेंस नहीं बन सकता। नियमों में कुछ बदलाव जरूर हुआ है, लेकिन किसी भी नियम में छूट नहीं दी गई है।