कुंभ स्नान और कल्पवास का महत्व बताया
छुटमलपुर। समृद्ध भारत न्यास के प्रधान न्यासी डॉ. वाचस्पति त्रिपाठी ने कहा कि कुंभ स्नान एवं कल्पवास की जीवन शैली प्राकृतिक टीकाकरण है। यह भारतीय दर्शन, आयुर्वेद एवं योग के क्षेत्र प्रधानवाद सिद्धांत पर आधारित है।
डॉ. वाचस्पति त्रिपाठी शनिवार को यहां मनकामेश्वर शिव मंदिर में क्षेत्रवासियों की जिज्ञासाओं का समाधान कर रहे थे।
उन्होंने बताया कि विश्व भर के विकसित देश सुपर बग रोगाणुरोधी प्रतिरोध जनित सूक्ष्म जीवाणुओं के प्रति चिंतित है। ऐसे में उनके शोध बीज प्रधानवाद दर्शन पर ही आधारित हैं। उन्होंने बताया कि शोध से यह स्पष्ट हो चुका है कि कुंभ स्नान एवं कल्पवास की जीवन शैली संक्रमण बीमारियों के प्रति बचाव का एक माध्यम है। उन्होंने बताया कि महाकुंभ के अवसर पर प्रत्येक प्रमुख स्नान दिवस पर संगम स्थल और उसके आस पास से जल के करीब 765 नमूने लिए गए। इनके सुक्ष्म जीवाणुओं जैसे सलमोनेला, कालिफार्मस, स्यूडोमोनास, फन्जाई, हेट्रोजिनस जीवाणुओं का अध्ययन किया गया। इसके साथ ही फीजियो केमिकल्स टेस्ट किए गए और कल्पवास करने वाले एक हजार कल्पवासियों के स्वास्थ्य और रक्त का परीक्षण किया गया। किसी भी कल्पवासी को कोई भी संक्रमण बीमारी या कोई व्याधि नहीं हुई।
उन्होंने बताया कि इन निष्कर्षों के आधार पर कुंभ स्नान और कल्पवास की जीवन शैली को प्राकृतिक टीकाकरण की संज्ञा दी गई है। उन्होंने लोगों से आह्वान किया कि वे कुंभ में भागेदारी कर स्नान करें और दूसरे लोगों को भी इसके लिए प्रेरित करें। इस मौके पर इंटर कालेज के प्रवक्ता डॉ. अशोक राय, डॉ. देवेंद्र सैनी, कंवरपाल राठी, संदीप रोहिला, ब्राह्मण सभा के नगर अध्यक्ष मांगेराम शर्मा और रसायन विज्ञान प्रवक्ता हरिशंकर मौर्य आदि मौजूद रहे।