फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

मां पर आरोप, सलाखों के भागीदार बच्चे

विज्ञापन
विज्ञापन
मां पर आरोप, सलाखों के भागीदार बच्चे
विज्ञापन

सहारनपुर। उन्होंने कोई अपराध नहीं किया, फिर भी रहते हैं सलाखों के पीछे। जहां जेल का नाम सुनने मात्र से लोग कांप जाते हैं, लेकिन जिला कारागार में ऐसे पांच मासूम हैं। जो अपनी मां के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज होने की वजह से जेल में हैं। बस फर्क इतना है कि इन मासूमों को पता नहीं कि यह जेल है।
इन पांच मासूमों में तीन लड़कियां और दो लड़के हैं। एक बच्ची की उम्र तो अभी मात्र आठ माह की ही है। एक बच्चे की उम्र डेढ़ साल, दो बच्चे ढाई साल के हैं, जबकि एक बच्ची पौने चार साल की है।
विज्ञापन

इन मासूमों में से तीन ने तो अभी जेल से बाहर की दुनियां ही नहीं देखी।
बुजुर्ग सुनाती हैं कहानियां, सभी करते हैं दुलार
जिला कारागार में महिला बंदियों के बीच ही बच्चों को दादा-दादी एवं परिवार के अन्य सदस्यों का प्यार मिल रहा है। नन्हें कदमों से बैरक में धमाचौकड़ी मचाने वाले बच्चों की तोतली बोली से ही मासूम अपनों का प्यार बंदी महिलाओं से पा रहे हैं। अन्य महिला बंदी उनके साथ खेलती हैं और उनकी भाव भंगिमाओं को देखकर अपने घर के बच्चों को याद करती हैं। बुजुर्ग महिला बंदी उसे कहानियां सुनाती हैं और उन पर दुलार जताती हैं। महिला बंदी एक मां ने बताया कि उसके साथ जो अधिक उम्र की महिला बंदी हैं उनसे बच्चे हिल-मिल गए हैं।
दहेज हत्या एवं दुष्कर्म के षड्यंत्र में बंद हैं महिलाएं
जिला कारागार अधीक्षक डाक्टर वीरेश राज शर्मा ने बताया कि जिला कारागार में 63 महिला बंदी हैं। जिनमें से पांच महिला बंदियों के बच्चे उनके साथ रह रहे हैं। तीन महिला बंदी तो दहेज हत्या के आरोप में बंद हैं, जबकि दो महिलाओं पर दुष्कर्म के षड्यंत्र का आरोप है।
जेल में मां के रहते हुए पैदा हुए चार बच्चे
जिला कारागार अधीक्षक डाक्टर वीरेश राज शर्मा ने बताया कि पांच में से चार महिला बंदियों ने जिला कारागार में बंद होने के दौरान ही जिला महिला अस्पताल में अपने बच्चों को जन्म दिया। जिनमें से एक बच्ची तो अभी आठ माह की ही है। छह साल की उम्र तक बच्चे अपनी मां के साथ रह सकते हैं। उनके परिजन मिलने के लिए आते रहते हैं।
विज्ञापन

जिला कारागार से ही खाने, कपड़े एवं बर्तनों की व्यवस्था
जेल अधीक्षक डॉक्टर वीरेश राज शर्मा ने बताया कि महिला बंदियों के साथ रह रहे बच्चों के लिए जिला कारागार में व्यवस्था की गई है। उनके लिए रोजाना आधा लीटर दूध, एक फल, साल में दो बार मौसम के अनुसार कपड़े तथा बर्तन दिए जाते हैं।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें