सहारनपुर। प्रदेश में पॉलीथिन के इस्तेमाल पर 15 जुलाई से प्रतिबंध लगा दिया गया है। प्रशासन की टीमें बाजारों में जाकर दुकानों तथा सब्जी और फल की रेहड़ियों से पॉलीथिन जब्त कर रही है। नतीजा यह है कि अनेक दुकानदारों तथा फल व सब्जी विक्रेताओं ने पॉलीथिन रखना बंद भी कर दिया है। मगर प्रत्येक व्यक्ति के मन में सवाल है कि सरकार बड़ी कंपनियों के खाद्य पदार्थों जैसे चिप्स, नमकीन, आटा, चावल, दालें आदि की पैकिंग में इस्तेमाल होने वाली पॉलीथिन पर बैन क्यों नहीं लगाती? जो सामान्य पॉलीथिन से कहीं अधिक खतरनाक है। अमर उजाला ने पॉलीथिन पर बैन को लेकर रविवार को कुछ दुकानदारों से बात कर उनकी राय जानी।
पुरानी चुंगी पर दुकान लगाने वाले फल विक्रेता खुर्शीद का कहना है कि सरकार ब्रांडेड सामान की पैकिंग में इस्तेमाल होने वाली पॉलीथिन पर बैन क्यों नहीं लगाती है। दूसरे फल विक्रेता मोहम्मद आजम ने भी सरकार की मंशा पर सवाल उठाए हैं। आरोप लगाया कि सरकार बड़ी कंपनियों के दबाव में है। यही वजह है कि बड़ी कंपनियों को पॉलीथिन का इस्तेमाल करने की छूट है और गरीब दुकानदारों को नहीं। दिल्ली रोड पर सब्जी बेचने वाले प्रवीण सैनी का भी सवाल बड़ी कंपनियों द्वारा इस्तेमाल की जाने वाली पॉलीथिन को लेकर ही है। पॉलीथिन का इस्तेमाल बंद कर चुके सब्जी विक्रेता गुरमीत सिंह का आरोप है कि सरकार का चाबुक गरीबों पर ही चलता है। सवाल है कि बड़ी कंपनियों को पॉलीथिन का इस्तेमाल करने में रियायत क्यों?
जो सवाल आम आदमी कर रहा है। वही सवाल हमारे भी दिमाग में है। मगर सरकार ने अभी केवल प्लास्टिक के कैरीबैग पर प्रतिबंध लगाया है। पैकिंग में इस्तेमाल होने वाली पॉलीथिन पर अभी छूट है। प्लास्टिक के कप और गिलास पर दो अक्तूबर के बाद रोक लगने की संभावना है। प्रशासन और नगर निगम सरकार की गाइडलाइन के अनुरूप काम कर रहे हैं। यदि पैकिंग में इस्तेमाल होने वाली पॉलीथिन पर बैन होगा तो उसे भी लागू कराया जाएगा।
- डॉ. एके त्रिपाठी, नगर स्वास्थ्य अधिकारी।
जगदीप कुमार-------------