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ग्लूकोज चढ़वाने से नहीं टूटता रोजा

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सहारनपुर। हेल्प लाइन पर जमीयत दावतुल मुसलीमीन के संरक्षक व इमाम सैय्यद इसहाक गोरा ने शुक्रवार को भी रोजेदारों के सवालों के जवाब दिए।
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सवाल- गांव लखनौती निवासी शाहिद ने पूछा कि उनको पेट में रोग की वजह से डाक्टर ग्लूूकोज चढ़वाने की सलाह दे रहे हैं। वह रोजे से हैं और रोजा तोड़ना नहीं चाहते। अब ऐसी सूरत में क्या करें?
जवाब- ग्लूकोज से दी जाने वाली दवा को खाना-पीना नहीं कहते। रोजे की हालत में ग्लूकोज चढ़वा सकते हैं। इससे रोजा नहीं टूटेगा।
सवाल- शहीद गंज निवासी इब्राहिम बख्शी ने पूछा कि वह रोजे की हालत में तेज धूप में मंडी जाते हैं और सिर पर गीला कपड़ा डाल लेते हैं। कुछ लोग कहते हैं रोजे में ऐसा करना सही नहीं है।
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जवाब- यदि कोई व्यक्ति रोजे की हालत में ठंडक पहुंचाने के लिए सिर पर गीला कपड़ा डालता है तो इससे रोजे पर कोई असर नहीं आएगा।
सवाल- गंगोह निवासी अरशद ने पूछा कि उनके भाई ऐतेफाक में बैठना चाह रहे हैं। ऐतेकाफ में कोई खास इबादत शरीयत में मुकर्रर है तो बताएं।
जवाब- ऐतेफाक पर शरीयत में कोई खास इबादत की शर्त नहीं बताई गई है। ऐतेफाक वालों को चाहिए कि नमाज, कुरान-ए-पाक की तिलावत, दीन की पुस्तकों को पढ़ना या जो मन चाहे इबादत करनी चाहिए।
सवाल-खाताखेड़ी निवासी इस्लाम ने पूछा कि अगर कोई व्यक्ति अपने मुंह बोले भाई को जकात देना चाहे तो शरीयत के अनुसार इसमें कोई हर्ज तो नहीं है।
जवाब- कोई व्यक्ति अपने हकीकी भाई या मुंह बोले भाई को जकात या सदका दे सकता है। शरीयत में इसकी इजाजत है।
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