सहारनपुर। जिला प्रशासन इंग्लिश मीडियम स्कूलों में शासन के आदेश और शिक्षा का अधिकार कानून को लागू कराने के लिए कसरत कर रहा है। मगर जानकर हैरानी होगी कि जनपद में अनेक हिन्दी मीडियम स्कूल तक विभागीय अधिकारियों की मानने को राजी नहीं हैं। नतीजा यह है कि माध्यमिक शिक्षा परिषद से संबद्ध अनेक स्कूल इंग्लिश मीडियम स्कूलों की तर्ज पर अभिभावकों का उत्पीड़न करने से बाज नहीं आ रहे हैं।
धोबीघाट क्षेत्र में माध्यमिक शिक्षा परिषद से संबद्ध एक इंटर कॉलेज है। महंगी फीस और इंग्लिश मीडियम स्कूलों की तरह प्रबंधन और कॉलेज प्रशासन की मनमानी के कारण गरीब और मध्यम वर्ग के बच्चों का यहां दाखिला पाना मुश्किल रहता है। यहां इंग्लिश मीडियम स्कूल की तरह एलकेजी से आठवीं तक की पढ़ाई है, जिसमें शिक्षा का अधिकार कानून का पूरी तरह मखौल उड़ाया जा रहा है। भले ही माध्यमिक शिक्षा विभाग अपने स्कूलों में सरकारी किताबों को लागू करने के आदेश जारी करता रहा हो, मगर ऐसे स्कूलों के लिए सभी आदेश बेमानी हैं। पिछले करीब दो दशक से स्कूल एलकेजी से 12वीं तक के बच्चों से इंग्लिश मीडियम स्कूलों की तरह फीस की वसूली कर रहा है। धोबीघाट क्षेत्र का यह स्कूल मात्र उदाहरण है। शहर ही में माध्यमिक शिक्षा परिषद से मान्यता प्राप्त ऐसे अनेक स्कूल हैं, जो खुद को मोटी फीस के चक्कर में खुद को इंग्लिश मीडियम साबित करने के लिए नियमों को ताक पर रख रहे हैं। उधर, डीआईओएस का कहना है कि अभी तक उनके पास किसी कॉलेज के द्वारा मनमानी फीस वसूलने की शिकायत नहीं आई है। यदि कोई शिकायत करता है तो मामले की जांच कराकर जरूरी कार्रवाई की जाएगी।