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जेल से नहीं, जिदंगी से मिल गई मुक्ति -

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सहारनपुर। जिला कारागार में हत्या के मामले में आजीवन कारावास की सजा काट रहे 78 वर्षीय कैदी जमशेद की बीमारी के चलते मौत हो गई। मेडिकल बोर्ड ने कई माह पहले ही उनकी उम्र को देखते हुए रिहा किए जाने की संस्तुति की थी। सरकारी तंत्र की लेट-लतीफी में चार माह में उनकी रिहाई पर तो मोहर नहीं लग सकी, मगर रिहाई के इंतजार में उसे जिंदगी से जरूर मुक्ति मिल गई।
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देवबंद के मोहल्ला पठानपुरा में 1989 में हुई हत्या के मामले में मोहल्ले के ही जमशेद समेत कई लोगों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी। 1989 से ही वह जिला कारागार में बंद थे। हालांकि कुछ समय के लिए वह जमानत पर बाहर आ गए थे, लेकिन बाद में उनकी जमानत निरस्त हो गई। तब से वह जेल में ही सजा काट रहे थे। बृहस्पतिवार को बंदी जमशेद की अचानक तबियत खराब हो गई। जेल प्रशासन ने जमशेद को जिला अस्पताल में भर्ती कराया। जहां उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई। सूत्रों के मुताबिक पिछले साल 23 दिसंबर को अधिक उम्र के चलते जमेशद और उसके साथियों की रिहाई की संस्तुति की गई थी। सुल्तान की पहले मौत हो गई थी, अब जमशेद रिहाई के इंतजार में चल बसे। जिला कारागार अधीक्षक डाक्टर वीरेश राज शर्मा जमशेद की उम्र काफी हो चुकी थी और वह बीमार भी था। चिकित्सकों ने बताया कि कार्डनरी हार्ट प्राब्लम हो गई है। जिस कारण उसकी मौत हुई है।
रिहा किए जाने की हुई थी संस्तुति
जेल अधीक्षक डाक्टर वीरेश राज शर्मा ने बताया कि मेडिकल बोर्ड ने कुछ माह पूर्व सभी का मेडिकल चेकअप किया था। उस समय देवबंद के पठानपुरा में हुई हत्या के मामले में पांच बुजुर्ग आजीवन कारावास की सजा काट रहे थे। मेडिकल बोर्ड ने उनकी उम्र और बीमारी को देखते हुए उनको रिहा किए जाने की संस्तुति कर दी थी। सभी पांचों की फाइल शासन को भेजी जा चुकी थी। पहले सुल्तान की मौत हो गई और अब जमशेद की मौत हो गई। अब सिर्फ तीन लोग रह गए हैं। तीनों केे रिहा किए जाने की फाइल शासन विचाराधीन है।
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