सहारनपुर। राज्य किसान आय आयोग के गठन और मौजूदा सीजन में गन्ना मूल्य 500 रुपये प्रति क्विंटल करने सहित अन्य मांगों को लेकर पश्चिमी उत्तर प्रदेश मुक्ति मोर्चा ने कमिश्नर को ज्ञापन सौंपा। उन्होंने कहा कि सरकारी शोध संस्थानों और कृषि विश्वविद्यालयों द्वारा 327 रुपये प्रति क्विंटल लागत बताई जा रही है, जो गलत है। उन्होंने गन्ना उत्पादन की वास्तविक लागत 444 रुपये प्रति क्विंटल बताया।
बृहस्पतिवार को कमिश्नर को सौंपे ज्ञापन में पश्चिमी उत्तर प्रदेश मुक्ति मोर्चा ने कहा कि बकाया गन्ना मूल्य का तुरंत भुगतान कराया जाए। उन्होंने कहा कि महंगाई और बढ़ती लागत को देखते हुए प्रदेश सरकार को गन्ना किसानों को 100 रुपये क्विंटल अपने खाते से दिया जाए। उन्होंने घटतौली करने वाले मिल के प्रबंधकों और मालिकों को जेल भेजने, एक क्विंटल गन्ने से एक किलो कर्दा नहीं काटने, किसानों को प्रेसमड निशुल्क दिलाने की मांग की । ज्ञापन में उन्होंने कहा कि प्रदेश में गन्ना विकास समितियों का विकास कमीशन नियम के अनुसार 3 प्रतिशत के हिसाब से 7.65 रुपये प्रति क्विंटल दिलाने, देवबंद सहकारी गन्ना विकास समिति का गन्ना संघ लखनऊ पर बकाया 11 करोड़ रुपये को तत्काल दिलाने और किसानों को कृषि कार्य के लिए मुफ्त बिजली और कनेक्शन दिलाने आदि की मांग भी की। इससे पहले उनकी सर्किट हाउस में बैठक का आयोजन हुआ। अध्यक्ष भगत सिंह वर्मा, डॉ. एसके काकरेान, मौहम्मद कैसर आलम, डॉ. पहल सिंह सैनी, धीरेंद्र चौधरी, सरदार अर्जुन सिंह, विनोद सैनी, सरदार गुलविन्दर सिंह, नरेश कुमार, सुभाष त्यागी, मोहम्मद असगर अली आदि ने विचार रखे। अध्यक्षता राजेंद्र सिंह मान और संचालन हाफिज मुर्तजा ने किया।