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मेघनाद वध के बाद सती हुई सुलोचना

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बड़गांव/अंबेहटा/बेहट/चिलकाना/गंगोह (सहारनपुर)। देहात में चल रही रामलीलाओं में बृहस्पतिवार की रात कुंभकर्ण और मेघनाद के वध के बाद सुलोचना के सती होने की लीला का मार्मिक मंचन किया गया।
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बड़गांव में मानव कल्याण क्लब के तत्वावधान में आयोजित रामलीला मंचन के दौरान बीती रात कुंभकर्ण एवं मेघनाद वध के बाद सुलोचना सती का मंचन देख दर्शक भाव विभोर हो उठे। प्रबंधक रिषीपाल राणा, निक्की शर्मा, सुखपाल शर्मा, नाथी सिंह, नकली सिंह, सुखपाल पुंडीर, मुकेश राणा, राजेन्द्र धीमान, शिवकुमार शर्मा, बिजेन्द्र सिंह, योगेश शर्मा आदि मौजूद रहे।
अंबेहटा में चल रही रामलीला में बृहस्पतिवार रात को विभिषण शरणागत, रावण अंगद संवाद व लक्ष्मण शक्ति की लीला का मार्मिक मंचन किया गया। मंच संचालक नरेश गोयल रहे। इस दौरान रतन पांचाल, बोबी जैन, नितिन भटनागर, शम्मी जैन, मुकेश कश्यप, इसम सिंह, मूंगा, सन्नी मित्तल, राजकुमार खुराना आदि रहे।
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बेहट में श्रीराम लीला उत्सव समिति द्वारा आयोजित रामलीला में लक्ष्मण जी के मूर्छित होने पर श्रीराम विलाप का मंचन देख दर्शक भाव विभोर हो गए। इसके बाद हनुमान जी द्वारा संजीवनी बूटी लाने, लक्ष्मण को होश आने और मेघनाद का वध करने, श्रीराम द्वारा कुंभकरण का वध का मंचन किया गया। इस मौके पर प्रबंधक संजीव कर्णवाल उर्फ बोबी, कोषाध्यक्ष विपिन सिंघल, अनिल सिंघल, अजय सिंघल उर्फ टीपू, अंशुल सिंघल, मोहित जैन, भुवनेश्वर राणा, संजीव उपाध्याय आदि मौजूद रहे।
चिलकाना के सुल्तानपुर में चल रही श्रीराम लीला में लक्ष्मण मूर्छा तथा कुंभकर्ण वध की लीला का मंचन किया गया। निदेशक बबलू त्यागी, ताराचंद तथा सुनेश सैनी के निर्देशन में राम की भूमिका अमित, रावण की भूमिका में आदेश सैनी, लक्ष्मण की भूमिका में पीयूष, हनुमान की भूमिका सोनू सैनी, मेघनाद की भूमिका में रजत सैनी तथा कुंभकर्ण की भूमिका सिट्टू सैनी ने निभाई। चौपाई गायक मामराज तथा ढोलकवाद कासिम ने श्रोताओं का मन मोह लिया। इस दौरान प्रधान प्रकाश चंद, डा. हुकुम सिंह, सीताराम सैनी, अमरनाथ सैनी, सुखदेव सिंह, बसंत गुप्ता, संदीप, शिवकुमार सैनी, जयपाल सैनी, सचिन, अंकित सैनी, गौरव जैन, अनिल आदि थे। मंच संचालन मनोज सैनी ने किया।
गंगोह की रामलीला में मेघनाद और लक्ष्मण के बीच घमासान युद्ध और लक्ष्मण मूर्छा का मंचन किया गया। बाद में हनुमान द्वारा संजीवन बूटी लाने और लक्ष्मण के होश में आने के बाद मेघनाद से युद्ध हुआ, जिसमें मेघनाद के वध के बाद उसकी पत्नी भी सलोचना भी सती हो गई।
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