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50 दिन के बाद भी खत्म नहीं हो सकी बैंकों की लाइन

Thu, 29 Dec 2016 12:31 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, सहारनपुर
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बैंकों की लाइन में लगे लोग। - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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सहारनपुर में बुधवार को नोटबंदी के 50 दिन पूरे हो गए, लेकिन न तो बैंकों से लाइन खत्म हो पाईं और न ही एटीएम की लाइन ही छोटी हुई। 100 से अधिक एटीएम के 50 दिन बाद भी शटर नहीं खुल पाए।
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बुधवार की शाम तक कोर्ट रोड स्थित एसबीआई के एटीएम पर लाइन लगी रही। जबकि कई बैंकों के शटर तक नहीं खुल पाए। 100 से अधिक एटीएम अभी भी खाली पड़े हुए हैं।

जबकि बैंक अभी भी ग्राहकों को निर्धारित से अधिक पैसा नहीं दे पा रहीं हैं। 50 दिन पूरे होने के बाद भी लोगों को राहत नहीं मिल पाई है।  नोटबंदी के बाद लोगों में पैसों के लिए मारामारी सी मच गई। बैंकों के बाहर लंबी लाइनें लग गईं।
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पहले तो नोट बदलवाने के लिए लाइनें लगीं। पुराने नोट जमा करने एवं पैसे निकालने के लिए हंगामा होता रहा। लाइनें इतनी लंबी लगी रहीं कि पुलिस के भी पसीने छूट गए। कई जगह पर पुलिस और आम लोगों में नोकझोंक और मारपीट तक हुई।

बैंकों की सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई। लोगों के पास ही नहीं कई बैंकों में भी कैश की किल्लत हो गई। जिसके चलते कुछ बैंक महीने भर सूने पड़े रहे। उनके ग्राहक भी दूसरे बैंकों में जाकर नोट बदलवाने के लिए सुबह से शाम तक लाइन में लगे रहे।

पांच सौ एवं एक हजार रुपये के नोट बदलवाने को लेकर बैंकों एवं डाकघर में इतनी लंबी लाइन लग गई कि बैंक एवं डाकघर में नोट ही समाप्त हो गए। अपने ही पैैसे निकालने के लिए सुबह से शाम तक लाइन में लगने के बावजूद पैसे न मिलने पर लोगों का धैर्य जवाब दे दिया।

पैसे न मिल पाने से आक्रोशित ग्राहकों ने लगातार दो दिन डाकघर में हंगामा और तोड़फोड़ की। दिल्ली रोड स्थित कार्पोरेशन बैंक, हकीकत नगर स्थित बैंक आफ बड़ौदा एवं पेपर मिल रोड स्थित बैंक ऑफ बड़ौदा की शाखा में भी तोड़फोड़ की गई।

नोटबंदी के बाद नोटों की ऐसी किल्लत हो गई कि जिलेभर में आपातकाल के जैसी स्थिति नजर आने लगी। बैंकों के बाहर पुलिस तैनात कर दी गई। बैंक कर्मचारी सुबह 8 बजे से रात 12 बजे तक बैंकों में काम करने को मजबूर हो गए।

बैंक कर्मचारियों का अवकाश बंद कर दिया गया। अवकाश के दिनों, रविवार को भी बैंकों को खुलवाया गया। ग्राहकों में किसी को दो हजार रुपये से अधिक एटीएम से अब तक नहीं मिल पाए। लोग अपना सारा काम छोड़कर सुबह से शाम तक बैंकों और एटीएम की लाइन में लगे रहे। 

 बैंकों में नोट बदलने, पुराने नोट जमा करने, पैसे निकालने को लेकर बैंकों के नियम लगातार बदलते रहे, जिस कारण गफलत की स्थिति बन गई। पहले एटीएम से 2500 रुपये निकासी निर्धारित की गई बाद में 2000 रुपये कर दी गई।

पहले दिन 4000 रुपये तक बदलने का फरमान जारी किया गया, फिर 4500 रुपये और फिर 4000 रुपये कर दिया गया। निकासी के लिए पहले 10000 रुपये तक एक बार में, फिर 24000 रुपये तक एक सप्ताह में निकालने का आदेश जारी किया गया।

शादियां प्रभावित होने के बाद आदेश जारी किया गया कि शादी का कार्ड एवं शपथ-पत्र दिए जाने के बाद 250000 रुपये तक माता अथवा पिता के खाते से निकाले जा सकेंगे।

 नोटबंदी के बाद जिले में कमीशन पर नोट बदलने का कारोबार बड़े पैमाने पर शुरू हो गया। पहले 30 प्रतिशत में फिर 20 प्रतिशत में और बाद में 15 प्रतिशत कमीशन पर नोट बदलने का धंधा चला। पुलिस ने शहर की बड़ी नहर से तीन लाख रुपये के 2000 के नोट पकड़े, जबकि देवबंद से 18 लाख रुपये जब्त किए।

नोटबंदी के दौरान ही बेहट की भारतीय स्टेट बैंक से चोरों ने सेंधमारी कर 10 लाख रुपये के नोट चोरी कर लिए। जिससे पूरे जिले में हड़कंप मच गया। पुलिस की कई टीमें लगा दी गईं।

इस मामले में पुलिस ने एक आरोपी को पकड़ लिया, जबकि अभी चार लोग फरार हैं। इसके अलावा शहर के माधो नगर स्थित पंजाब नेशनल बैंक से दस हजार रुपये निकलवाने आया एक व्यक्ति दो लाख रुपये की गड्डी लेकर चंपत हो गया।

 नोटबंदी ने बाजार में छोटे दुकानदारों को खाली बैठना पड़ गया। बैंक से सिर्फ 2000 का नोट मिलने लगा, जिसको खुलाने के लिए दुकानदारों के पास पैसे ही नहीं मिले। उसके बाद पेटीएम और कार्ड स्वाइप मशीन से कैशलेस भुगतान शुरू किया गया तो कुछ राहत मिली।

नोटबंदी के बाद बाजार को कैशलेस मार्केटिंग ने नई जान दी। जेब में नोट न होने के चलते बंद हुई खरीददारी को पे-टीएम और क्रेडिट एवं डेबिट कार्ड के स्वाइप मशीन ने गति प्रदान की, और बाजार में फिर से रौनक लौटी। छोटे दुकानदारों सब्जी विक्रेता से लेकर चाय, कन्फेक्शनरी तथा परचून की दुकान भी कैशलेस हो गए। 

 नोटबंदी के 50 दिन बाद भी लोगों को बैंकों से कोई राहत नहीं मिल रही है। दो तथा चार हजार रुपये के लिए लोग सुबह ही लाईनों में लग जाते हैं। एसबीआई तथा पीएनबी में उपभोक्ताओं को दो हजार रुपये तथा अधिक मांग करने पर चार हजार रुपये दिए जा रहे हैं। बैंक प्रबंधकों का कहना है कि डिमांड करने के बाद भी उन्हें कैश नहीं मिल पा रहा है। इससे ग्राहाकों को कैश दिया जा रहा है। 
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