देवबंद (सहारनपुर)। उत्तर प्रदेश के सीतापुर में महिला द्वारा पति को छोड़कर सहेली के साथ रहने और उससे संबंध बनाने के मामले में देवबंदी उलमा ने इसे नाजायज और हराम अमल करार दिया है। उलमा का कहना है कि इस्लाम धर्म में इस प्रकार के अमल की कोई गुंजाइश ही नहीं है।
मसले को लेकर मदरसा जामिया शेखुल हिंद के मोहतमिम मौलाना मुफ्ती असद कासमी का कहना है कि इस्लाम में ऐसा कोई भी अमल नहीं है कि एक औरत दूसरी औरत और मर्द दूसरे मर्द के साथ मिया बीवी जैसा रिश्ता रखा। बल्कि इस तरह के रिश्ते को इस्लाम में नाजायज और हराम करार दिया गया है। उन्होंने कहा कि औरत और मर्द के लिए कुदरत ने कायदे कानून बनाए हुए हैं जिन पर अमल करके वह अपने जीवन को खुशी खुशी गुजार सकते हैं। मगर कुछ लोग कुदरती नियमों को दरकिनार कर रहे हैं जो अल्लाह के अजाब की वजह बनते हैं। औरत का औरत से और मर्द का मर्द से संबंध बनाना बहुत बड़ा गुनाह है। जो लोग ऐसा करते हैं वो अल्लाह की सख्त नाराजगी का शिकार होते हैं। मौलाना सगीर कासमी का कहना है कि अल्लाह के निजाम में किसी भी तरह की तब्दीली नहीं की जा सकती। अल्लाह ने मिया और बीवी के रिश्ते को पाक रिश्ता बनाया है। इसमें अगर कोई बदलाव करता है तो वह सरासर नाजायज है।
भागवत बाबरी मस्जिद बनवाएं तो मुस्लिम खुशी से गले मिलेंगे : उलमा
देवबंद। अयोध्या में राम मंदिर बनाकर मुसलमानों को गले लगाने वाले आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के बयान पर देवबंदी उलमा का कहना है कि भागवत राम मंदिर की जगह बाबरी मस्जिद बनवाकर मुसलमानों को गले लगाएं तो वह खुशी खुशी उनके गले लगने को तैयार हैं।
मजलिस इत्तेहाद-ए-मिल्लत के प्रदेशाध्यक्ष मुफ्ती अहमद गौड़ का कहना है कि जब राम मंदिर बनने से हिंदू मुस्लिमों के बीच विवाद खत्म हो सकता है तो मस्जिद बनने से यह विवाद खत्म क्यों नहीं हो सकता। उन्होेंने कहा कि जैसे जैसे चुनाव का वक्त नजदीक आ रहा है मोहन भागवत और आरएसएस के नेता इसी तरह की बातें करते हैं। ताकि चुनाव में इसका लाभ मिल सके। मुफ्ती अहमद का कहना है कि मंदिर मस्जिद के नाम पर राजनीति बंद होनी चाहिए ताकि मुल्क में आपसी भाईचारा मजबूत हो सके।