सुभाष हत्याकांड का खुलासा न होने पर थाना घेरा
बड़गांव (सहारनपुर)। स्कूल प्रबंधक सुभाष हत्याकांड का खुलासा नहीं होने पर रविवार को लोग भड़क उठे। आक्रोशित लोगों ने थाना का घेराव कर हंगामा किया। लोगों ने पुलिस प्रशासन के खिलाफ रोष जताया। अधिकारियों ने हत्याकांड के खुलासे के लिए दो दिन की मोहलत मांगी है। इसके बाद ही लोग शांत हुए।
बृहस्पतिवार की रात को स्कूल से अपने गांव बालू माजरा लौटते समय स्कूल प्रबंधक सुभाष का अपहरण कर लिया था और दो लाख रुपये की फिरौती मांगी थी। लेकिन फिरौती लेने की बजाय बदमाशों ने सुभाष की गोली मारकर हत्या कर दी थी। शव शुक्रवार की सुबह मौरा गांव के एक खेत में पड़ा मिला था। घटना से गुस्साए लोगों ने शव रखकर जाम लगाया तो जिले के तमाम अधिकारियों समेत जिलाधिकारी मौके पर पहुंचे थे और उन्होंने 24 घंटे में हत्या का खुलासा करने का आश्वासन भी दिया था। लेकिन तीन दिन बाद भी पुलिस हत्या का खुलासा करना तो दूर हत्या के कारणों तक का पता नहीं लगा सकी।
रविवार को मृतक सुभाष की अस्थियां चुनने के बाद गांव में लोग एकत्रित होकर थाना पहुंचे और थाना का घेराव कर लिया। लोगों ने पुलिस से घटना के खुलासे के आश्वासन के बारे में जानकारी मांगी। लेकिन पुलिस कोई जवाब नहीं दे सकी। जिस पर लोगों ने हंगामा शुरू कर दिया। लोग थाना परिसर में ही बैठ गए और पुलिस एवं प्रशासन के खिलाफ रोष जताया।
सूचना मिलते ही थाना प्रभारी संजीव कुमार मौके पर पहुंचे। उन्होंने लोगों को समझाया। बताया कि पुलिस की कई टीमें इस घटना के खुलासे में लगी हुईं हैं। उन्होंने अधिकारियों से बात करके लोगों को दो दिन में घटना का खुलासा कर दिए जाने का आश्वासन दिया। जिसके बाद लोग शांत हुए। थाना का घेराव करने वालों में नानौता ब्लाक प्रमुख के पति रिषीपाल सिंह, जिपं सदस्य नकली सिंह, भाजपा नेता रविंद्र सिंह, सुधीर, शिवकुमार, अरविंद, सुखपाल राणा, अजय राणा सहित सैकड़ों लोग मौजूद रहे।
पुलिस ने कराया घटना का रीटेक
पुलिस ने घटना के खुलासे के लिए घटना का रीटेक किया। पुलिस ने गांव के ही राकेश एवं उसके एक अन्य साथी को लेकर घटना स्थल पर पहुंची। राकेश से भी बदमाशों ने बाइक छीनी थी। राकेश के अनुसार उस समय बदमाशों ने सुभाष को पकड़ रखा था। पूरी घटना को समझने के लिए पुलिस दोनों लोगों से घटना को पूरा कराकर देखा गया। बदमाश किस स्थान पर खड़े थे। किधर मुंह था, सुभाष को किस तरह से पकड़ रखा था, उन्हें किस तरह से रोका गया। कितने लोगों ने उसकी बाइक छीनी और कितने लोग सुभाष को पकड़े रहे।
एसपी देहात विद्यासागर मिश्र ने बताया कि राकेश ने चार बदमाशों के होने की बात बताई थी। जिन्होंने सुभाष को पकड़ रखा था। बाइक भी ले रखी थी। राकेश की सिर्फ बाइक लूटी। जबकि पहले से ही लूटी गई बाइकों को भी नहर में फेंक दिया।
घटना से चार दिन पूर्व रात में स्कूल पहुंचे थे कुछ लोग
पुलिस के अनुसार स्कूल के चौकीदार से की गई पूछताछ में यह बात सामने आई है कि घटना से तीन चार दिन पूर्व कुछ लोग रात में स्कूल पहुंचे थे और चौकीदार से स्कूल का गेट खोलने के लिए काफी दबाव बनाया था। लेकिन उस दिन स्कूल में सुभाष नहीं थे। जिस कारण चौकीदार ने बिना सुभाष के आदेश के स्कूल का गेट खोलने से इंकार कर दिया था। वे लोग काफी देर तक आसपास घूमने के बाद चले गए थे। पुलिस उन लोगों की भी जानकारी का प्रयास कर रही है कि वे लोग कौन थे।
भाड़े के शूटरों ने तो नहीं दिया सुभाष हत्याकांड को अंजाम ?
पुलिस के अनुसार बृहस्पतिवार की रात स्कूल प्रबंधक सुभाष राणा की जिस तरह से हत्या की गई। उससे ऐसा कोई शूटर ही कर सकता है। पुलिस की एक टीम भी इस दिशा में कार्य कर रही है। पुलिस के शक की सुई मेरठ के शूटरों पर जाकर टिक रही है। जिसके लिये पिछले दो दिनों से पुलिस मुजफ्फरनगर एवं मेरठ में डेरा डाले हुए है।
फिर से तो सक्रिय नहीं हो गया फिरौती गैंग ?
देवबंद एवं बड़गांव क्षेत्र में इससे पहले भी अज्ञात बदमाश इस प्रकार की छोटी छोटी फिरौती वाली अन्य कई घटनाओं को कई बार अंजाम दे चुके हैं। बृहस्पतिवार की रात स्कूल प्रबंधक सुभाष की स्कूल से घर लौटते समय बीच रास्ते में बाइक सहित अपहरण के चंद घंटे बाद ही हत्या करना पुलिस ही नही क्षेत्रीय ग्रामीणों के गले नही उतर रहा है। इसलिए क्या कहीं फिर से तो नही ऐसा कोई गैंग क्षेत्र में सक्रिय हो चला है। माना जा रहा है कि कहीं अपहरण के बाद पुलिस और ग्रामीणों के दबाव के चलते प्रबंधक हत्या कर दी।
करीब दो दशक पूर्व दल्हेड़ी गांव निवासी एक युवा व्यापारी को देर शाम कस्बा स्थित दुकान से घर लौटते समय बीच रास्ते में बदमाशों ने हथियारों के बल पर अगवा कर लिया था, बाद में चर्चा रही थी कि बदमाशों ने अपहृत को फिरौती लेकर ही छोड़ा। ऐसे ही गांव सैनपुर से एक दूधिया को बदमाशों ने बाइक सहित अगवा कर लिया और बिना पुलिस की सहायता के ही परिजनों से बदमाशों को गुपचुप तरीके से फिरौती देकर छुड़वा लिया था। इसी प्रकार वर्ष 2009 में जड़ौदा पांडा के मजरे किशनपुरा से भी एक दूधिया को उसकी बाइक सहित अज्ञात बदमाशों ने हथियारों के बल पर अगवा कर लिया गया था, उसे भी बदमाश फिरौती के बाद जंगल में छोड़कर फरार हो गए थे। क्षेत्र के गांव चिराऊ से एक प्राइवेट चिकित्सक का भी ऐसे ही बदमाशों ने अपहरण करने के बाद फिरौती लेकर छोड़ा था। वहीं मिर्जापुर के एक गुप्ता परिवार से एक अधेड़ का अज्ञात बदमाशों ने उसके रामपुर स्थित चावल के सेल्हर से हथियारों के बल पर अपहरण कतर लिया था बाद में सूचना पर रामपुर व बड़गांव पुलिस ने नाकाबंदी करके अपहृत को बदमाशों के चंगुल से छुड़ाना चाहा लेकिन बदमाशों ने अपहृत की हत्या कर दी।
ग्रामीणों का कहना है कि अपहरण से जुड़े जितने भी मामलों में पुलिस का हस्तक्षेप या बदमाशों पर दबाव हुआ ज्यादातर में परिणाम विपरीत ही आए। थाना प्रभारी संजीव कुमार का कहना है कि पिछले दस वर्षों में लिखा पढ़ी में ऐसा कोई मामला नहीं है। यही मामला इस प्रकार का हुआ है।