सहारनपुर। निकाय चुनाव की उठापटक के बीच बसपा अब नए चेहरे पर दांव लगा सकती है। दलित-मुस्लिम गठजोड़ की संभावना तलाश रही बसपा ने फिलहाल पूर्व सांसद काजी रशीद मसूद की पुत्रवधू को प्रत्याशी बनाया है। मगर, मीट कारोबारी फजलुर्रहमान की लखनऊ में बसपा सुप्रीमो से मुलाकात के बाद कयासों का दौर शुरू हो गया है। राजनीतिक गलियारों में बसपा के टिकट पर संशय शुरू हो गया है। फिलहाल बसपा के कई नेता लखनऊ में डटे हैं और जिले में राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। उधर, मीट कारोबारी को मैदान में उतारने को लेकर कांग्रेस और सपा भी पहले कवायद कर चुकी है। अब बसपा के पाले से चुनाव मैदान में उतरने को नए सियासी चश्मे से देखा जाएगा।
निकाय चुनाव की घोषणा के ठीक बाद बसपा नेताओं ने एकजुट होकर काजी रशीद मसूद के बेटे शाजान मसूद को निकाय चुनाव की जिम्मेदारी की घोषणा की। इसके बाद शाजान मसूद ने अपनी पत्नी खदीजा मसूद को बतौर बसपा प्रत्याशी का ऐलान किया। मगर, इस बीच नए सियासी समीकरण में मीट कारोबारी फजलुर्रहमान को बसपाई लेकर लखनऊ पहुंच गए। सूत्रों की मानें तो बुधवार को बसपा प्रमुख मायावती ने मीट कारोबारी की मुलाकात के बाद प्रत्याशी बदलने के संकेत दे दिए गए हैं। हालांकि अब तक इस मामले में किसी तरह की आधिकारिक पुष्टि नहीं होने से सियासी गलियारों में चर्चाओं का बाजार भी गर्म है। यहा बता दें कि हाजी फजलुर्रहमान पर पहले सपा और फिर कांग्रेस दांव चलने के मूड में थी। मगर उस वक्त बातचीत का दौर ज्यादा लंबा नहीं चल पाया। इसके बाद अब बसपा के इस दांव से नगर निगम चुनाव की राजनीति भी गर्माने लगी है। फिलहाल बसपा के नए फैसले पर लोगों की निगाहें हैं। उधर, शाजान मसूद का कहना है कि हाईकमान के निर्णय का अमल होगा। हमारे के लिए पार्टी सर्वोपरि है।