किसानों की नाराजगी ने भी परिणाम पर डाला असर
सहारनपुर। कैराना उपचुनाव में भाजपा की हार में बकाया गन्ना मूल्य भुगतान के लिए तरस रहे किसानों की नाराजगी ने भी निर्णायक भूमिका अदा की है। पहले लोकसभा चुनाव और फिर विधानसभा चुनाव में किसानों से किए गए वादों के पूरा नहीं होने से भी किसानों में नाराजगी थी। यही कारण रहा कि लोकसभा और विधानसभा चुनाव में भाजपा को सिर माथे पर बैठाने वाले किसान इस बार गठबंधन के पाले में जाते दिखाई दिए।
पश्चिमी उत्तर प्रदेश की राजनीति में खासतौर पर गन्ना किसान महत्वपूर्ण भूमिका अदा करते रहे हैं। विधानसभा चुनाव में समय से गन्ना मूल्य भुगतान कराने में विफल रहने वाली सपा को किसान मतदाताओं ने धूल चटाने का काम किया था। उन्हें उम्मीद थी कि शायद भाजपा सरकार उन्हें समय से गन्ना मूल्य का भुगतान कराएगी। विधानसभा चुनाव में भाजपा के जिम्मेदार नेताओं ने किसानों का पूरा कर्ज माफ करने से लेकर किसानों की आय दुगनी करने जैसे वादे किए थे। उन्होंने कहा था कि किसानों को फसल का लाभकारी मूल्य दिलाने के लिए स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट को लागू किया जाएगा। सत्ता में आने के बाद भाजपा नेताओं के सुर बदलने लगे इसके चलते किसानों का पूरा कर्ज माफ करने का वादा पूरा नहीं हो सका। इसके अलावा किसानों में बकाया गन्ना मूल्य का अभी तक भुगतान नहीं होने पाने से भी भारी रोष व्याप्त है। मंडल के किसानों का शुगर मिलों पर अभी तक 202989 लाख रुपये बकाया हैं। यह भी तब है कि जब प्रदेश के गन्ना राज्य मंत्री सुरेश राणा थानाभवन से विधायक हैं। किसानों की उम्मीदों पर खरा नहीं उतरना भी कैराना उप चुनाव में भाजपा को भारी पड़ा है।