संस्कारों की कमी से पैदा हो रही विकृतियां
अंबेहटा। खेड़ा अफगान गांव में चल रहे आर्य समाज के 120वें वार्षिकोत्सव और व्यक्तित्व विकास शिविर का रविवार की रात को समापन हो गया। कार्यक्रम के अंतिम दिन विद्वानों ने परिवारों में आ रही विकृतियों पर चिंता जताते हुए इसका मूल कारण संस्कारों की कमी बताया।
अलमेर से पधारे आचार्य कर्मवीर ने कहा कि आज ज्यादातर परिवारों में झगड़े होने के कारण परिवारों की शांति भंग हो रही है। परिवार के सदस्यों के भीतर से प्रेम भावना समाप्त होती जा रही है जिसका मूल कारण परिवारों में संस्कारों का न होना है। उन्होंने बताया कि संस्कार ही मनुष्यों को अच्छे कार्यों की तरफ प्रेरित करते है परंतु आज हमारे परिवारों में संस्कारों का अभाव है। इसी कारण परिवारों में कलह, द्वेष भावना व ईष्या ने अपने पांव जमा लिए है। इन्हीं सब चीजों से ग्रस्त होकर हम लोग अपने घरों की शांति को नीलाम करने पर तुले हैं। वैदिक प्रवक्ता आचार्य रणवीर शास्त्री ने कहा कि आज का युवा पाश्चात्य संस्कृति को अपनाने की होड़ में अपनी संस्कृति को भूलता जा रहा है। भजनोपदेशक वेदपाल आर्य ने भी भजनों के माध्यम से देश की दुर्दशा पर चिंता जताई। संचालन वेद भूषण गुप्ता ने किया। कार्यक्रम में प्रधान आदित्य प्रकाश गुप्ता, श्यामलाल आर्य, यशपाल गुप्ता, राजेश कुमार आर्य, महीपाल, गौरव, वेदांत कुमार, दीपेश कुमार, पूनम गुप्ता, अदिति गुप्ता, शशी प्रभा, अनिता, विजय लक्ष्मी, रविंद्र कुमार, अमित कुमार आर्य, डा. अशोक कुमार आदि उपस्थित रहे।