सहारनपुर। जिले के प्रभारी मंत्री एवं प्रदेश के कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही द्वारा अवैध खनन पकड़े जाने के कुछ दिन बाद तक खनन पूरी तरह बंद हो गया था। यहां तक कि मिट्टी का खनन तक बंद हो गया था। मगर समय के साथ अवैध खनन करने वाले फिर से सक्रिय हो गए हैं। आलम यह है कि रात के अंधेरे में नदियों की कोख पर फावड़ा चलाया जा रहा है। इसके अलावा खेतों में जेसीबी तक लगाकर मिट्टी का खनन भी शुरू हो चुका है।
रात में खनन का काला कारोबार फिर से चल पड़ा है। आईटीसी रोड से प्रतिदिन दर्जन भर खनन से लदी ट्रॉलियां निकलने की शिकायत है, जो कॉलोनियों के बीच से होकर अपने गंतव्य तक पहुंच रही हैं। इसके अलावा बेहट रोड से आने वाला खनन भी कोतवाली से बचाकर निकाला जा रहा है। शहर के बीच से होकर निकल रही पांवधोई नदी का उद्गम स्थल शकलापुरी से है। वर्षों से भैंसा बुग्गी चालक रेत निकालते रहे हैं। एनजीटी की रोक का भी इन लोगों पर कोई असर नहीं पड़ा है। ये रेत की एक बोगी एक हजार रुपये से 1500 रुपये तक में बेच रहे हैं। पिछले दिनों मंत्री द्वारा जनपद में बड़े पैमाने पर खनन पकड़े जाने के बाद यहां भी खनन बंद हो गया था। मगर अब फिर से खनन शुरू हो गया है। उधर, मिट्टी का भी खनन बड़े पैमाने पर होता रहा है। शहर से सटे इलाकों से खनन करने वाले पूरे खेत के खेत खरीदकर उनमें से जेसीबी के माध्यम से मिट्टी उठाकर शहर में भराव के लिए बेच रहे हैं। पुराना कलसिया रोड पर गांव ज्ञानागढ़, बिशनपुर और वाल्मीकि बस्ती से होकर प्रतिदिन सैकड़ों ट्रॉली मिट्टी से भरी निकल रही हैं।
सड़कों को भी पहुंचा रहे नुकसान
खनन सामग्री उपलब्ध नहीं होने की वजह से शहर की तमाम सड़कें जर्जर हो चुकी हैं। देहात में भी सड़कों की हालत खराब है। मिट्टी के अवैध खनन से लदी ट्रॉलियों के दिनभर चलने से पुराना कलसिया रोड की हालत खस्ता हो गई है। इसे लेकर स्थानीय लोगों में नाराजगी है।
कुछ जगहों पर मिट्टी के खनन की परमिशन ली हुई है। मगर यदि कोई बिना परमिशन के मिट्टी का भी खनन कर रहा है तो उसके विरुद्घ कार्रवाई की जाएगी। रही बात रेत के खनन की तो पांवधोई से रेत निकालने पर रोक नहीं है। यमुना नदी से खनन नहीं किया जा सकता है।
- पीके पांडेय, डीएम।