मुठभेड़ से लेकर गश्त तक पुलिस की साथी रही ‘थ्री नॉट थ्री’
सहारनपुर। इनामी बदमाशों का एनकाउंटर हो, लूट और चोरी की घटना को अंजाम देने वाले बदमाशों से खुद को बचाना या फिर कारागार से कोर्ट तक बंदियों की पेशी हो, हर मामले में थ्री नॉट थ्री रायफल पुलिस की हमसफर रही है। अधिक लंबी और वजनी होने के बावजूद इसी रायफल ने खाकी का साथ निभाया है। इस बार गणतंत्र दिवस की परेड में भी पुलिस के जवानों के कंधे पर यह दिखाई देगी और इसी के साथ इस अंतिम विदाई हो जाएगी।
जिले में पिछले कुछ सालों में 50 से भी अधिक मुठभेड़ में शामिल रह चुके स्वॉट टीम प्रभारी मुबारिक हसन बताते हैं कि बेशक साइबर और हाईटेक क्राइम के दौर में अब पुलिस के जवानों को इंसास और एसएलआर जैसे आधुनिक हथियार मिलने लगे हों। लेकिन थ्री नॉट थ्री का अपना इतिहास और योगदान रहा है। यह रायफल लंबे समय तक याद रहेगी।
थाना सदर प्रभारी पंकज पंत और थाना मंडी प्रभारी बबलू कुमार वर्मा कहते हैं कि अधिकतर एनकाउंटर के समय पुलिस टीमों के पास इंसास के साथ ही थ्री नॉट थ्री रायफल भी रही है। कई मौकों पर इसका इस्तेमाल हुआ है। हालांकि हाल के कुछ वर्षों में अधिकतर बड़े बदमाशों का अंत करने में थ्री नॉट थ्री की जगह इंसास ने मदद की है।
कंधे पर थ्री नॉट थ्री देखते ही छंट जाती थी भीड़
थानों में तैनात कुछ पुलिस कर्मचारियों ने बताया कि जातीय हिंसा, खूनी संघर्ष से लेकर बड़े बवाल हुए तो भी थ्री नॉट थ्री रायफल ने बड़ा काम किया है। दो दशक पहले तक यह आलम था कि यदि ऐसी घटनाओं के समय इस रायफल के साथ पुलिस टीम दिख गई तो भीड़ खुद-ब-खुद छंटने लगती थी। अब अपराधी हाईटेक हो गए हैं। उनके पास ऑटोमेटिक हथियार होते हैं। इसलिए समय के साथ नए हथियारों की जरूरत बढ़ गई है।
ज्यादा है वजन
पुलिस कर्मचारियों का कहना है कि थ्री नॉट थ्री रायफल की मारक क्षमता तो 2000 मीटर तक की रही है। लेकिन दिक्कत इसकी लंबाई और वजन को लेकर रही है। इसे लोड करने, चलाने से लेकर मेंटेनेंस तक में काफी दिक्कतें रही हैं। इसलिए इसके विकल्प ढूंढने पड़े।
दो किमी तक करती है मार
थ्री नॉट थ्री रायफल करीब 44.5 इंच लंबी होती है। इसमें बैरल की लंबाई करीब 25 इंच होती है। थ्री नॉट थ्री की मारक क्षमता दो किमी तक की होती है। इनकी जगह अब 63 हजार इंसास रायफल लेंगी। इंसास की लंबाई करीब 37.8 इंच और इसकी बैरल की लंबाई 18.3 इंच होती है। इसकी मारक क्षमता करीब 400 मीटर होती है।
गश्ती टीमों का रही सहारा
देहात क्षेत्र के अधिकतर थानों और चौकियों पर तो गश्ती टीमों के लिए अब भी थ्री नॉट थ्री रायफल का सहारा है। इसी रायफल के सहारे सर्द रातों में भी पुलिस कर्मचारी गश्त करते आ रहे हैं।
वर्जन
- अधिकतर थानों में पुलिस कर्मचारियों के पास थ्री नॉट थ्री की जगह इंसास राइफल ने ले ली है। जो बची हैं, उन्हें भी बदला जा रहा है। इन्हें पूरी तरह बदला जाना प्रस्तावित है। गणतंत्र दिवस परेड में इसका प्रयोग होगा।
- दिनेश कुमार, एसएसपी, सहारनपुर