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20 साल में बढ़ गई 27.5 प्रतिशत आबादी

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सहारनपुर। जनसंख्या स्थिरता को लेकर तमाम कवायद होती हैं, लेकिन जिले में जनसंख्या का ग्राफ जिस तेजी से बढ़ा है, उसको आंकड़े बखूबी बयां करते हैं। क्योंकि 2001 से 2021 के बीच 20 साल के दौरान जिले की आबादी में 27.5 फीसदी की बढ़ोतरी हो चुकी है।
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आबादी में बढ़ोतरी के कई नुकसान भी सामने आ रहे हैं, जो वर्तमान परिवेश में बड़ी समस्या बने हुए हैं। क्योंकि जैसे जैसे जनसंख्या बढ़ी, वैसे ही वाहनों की खरीद भी ज्यादा होती गई। सड़कों पर वाहनों की अधिकता के कारण एक तरफ जहां ट्रैफिक जाम की समस्या पैदा हुई तो प्रदूषण में भी इजाफा हुआ। वायु प्रदूषण में 60 प्रतिशत से ज्यादा वाहनों की वजह से ही इजाफा होता है। इसका उदाहरण लॉकडाउन के दौरान भी सामने आया, क्योंकि लॉकडाउन में एक्यूआई 50 से भी नीचे पहुंच गया था, जिससे सहारनपुर से 120 किलोमीटर दूर स्थित पहाड़ियां तक दिखाई देने लगी थीं। जैसे ही लॉकडाउन समाप्त हुआ और वाहनों का आवागमन शुरू हुआ तो प्रदूषण फिर बढ़ गया। इसी तरह रोजगार के अवसर कम हुए हैं। साथ ही माल की खपत बढ़ने से महंगाई की मार भी झेलनी पड़ रही है। यह ऐसी समस्याएं हैं जो हर आम आदमी को परेशान करती हैं।
पर नहीं बढ़े संसाधन
जिस तेजी से जनसंख्या में बढ़ोतरी हुई, उस हिसाब से संसाधन नहीं बढ़ पाए हैं। विकास का पहिया भी रफ्तार नहीं पकड़ सका, क्योंकि विकास प्राधिकरण की तरफ से बीते 10 साल में ऐसी कोई आवासीय योजना ही लागू नहीं की जा सकी है। हालांकि आवास एवं विकास परिषद ने जरूर आवासीय कॉलोनियां विकसित की हैं। वहीं, प्राइवेट कॉलोनाइजर जरूर सक्रिय हुए और सहारनपुर शहर के चारों तरफ खेतों में कॉलोनियां काट दी गईं। एक तरफ दिल्ली रोड पर चुन्हेटी तक कॉलोनी काटी जा चुकी हैं तो मल्हीपुर रोड पर मल्हीपुर गांव के निकट तक, बेहट रोड पर साईं धाम तक और अंबाला हाईवे पर मेडिकल कॉलेज तक कॉलोनियां काटी जा चुकी हैं।
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ऐसे बढ़ी जिले की जनसंख्या
2001 की जनगणना में सहारनपुर जिले की जनसंख्या 28,96,863 थी, जबकि 2011 की जनगणना में 34,64,228 हो गई। वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में जिले की जनसंख्या करीब 39,79,403 पहुंच गई और वर्तमान में करीब 40 लाख से ऊपर हो गई है।
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