सहारनपुर। पांवधोई नदी के पानी का उपचार करने वाली फर्म ने गलत जीएसटी कोड देकर नगर निगम से 24 लाख रुपये से अधिक हड़प लिए। मुख्य नगर लेखा परीक्षक के ऑडिट में मामला पकड़ में आया है। खास बात यह है कि नगर निगम के जिम्मेदार अधिकारी एक साल तक चुप्पी साधे रहे और जनता का पैसा लुटाते रहे।
दरअसल, एनजीटी की कार्रवाई से बचने के लिए नगर निगम करीब तीन साल से पांवधोई नदी के पानी का उपचार करा रहा है। पहले कार्यदायी संस्था ने ओजोनेशन उपचार किया था। तब तीन साल के पानी के उपचार पर करीब 46 लाख रुपये खर्च हुए थे। बीते वर्ष नगर निगम ने अलग संस्था को यह जिम्मेदारी सौंपी, जो पानी का उपचार बायोरेमेडिएशन के माध्यम से कर रही थी।
इस प्रक्रिया से पानी के उपचार पर एक ही साल में 2,32,15,500 (दो करोड़ 32 लाख 15 हजार 500) रुपये खर्च कर दिए गए। हैरत की बात यह है कि सरकारी स्तर पर पानी के उपचार पर जीएसटी नहीं लगता, लेकिन नगर निगम के अधिकारियों ने आंख बंद कर 18 फीसदी जीएसटी भी चुका दिया।
इसमें कार्यदायी संस्था ने गलत जीएसटी कोड देकर नगर निगम से 24 लाख रुपये से ज्यादा गलत तरीके से वसूल कर लिए। मुख्य नगर लेखा परीक्षक के ऑडिट में मामला पकड़ में आया है। बता दें कि अमर उजाला द्वारा 12 से 15 नवंबर तक इस पर अभियान चलाया गया था। इसके बाद मुख्य नगर लेखा परीक्षक ने खर्च का संज्ञान लेते हुए ऑडिट शुरू किया था।
- अमर उजाला ने उठाया था मुद्दा
अमर उजाला ने 19 नवंबर के संस्करण में 15 लाख से 2.04 करोड़ पहुंच गया खर्च, ऑडिटर ने जताई आपत्ति, फाइल तलब शीर्षक से प्रमुखता के साथ समाचार प्रकाशित किया था।
यह भी सवाल सौ एमएलडी पानी कैसे
नगर निगम ने प्रति एमएलडी पानी के उपचार के लिए कार्यदायी संस्था को 647 रुपये भुगतान किया। नगर निगम ने अनुमान के अनुसार माना कि पांवधोई नदी से प्रतिदिन 100 एमएलडी पानी ढमोला में गिरता है। इस हिसाब से प्रतिदिन 64,700 रुपये 18 फीसदी जीएसटी सहित भुगतान किया गया, जो महीने में 19,41,000 रुपये और साल यानी 365 दिन में 2,36,15,500 रुपये बैठता है। सवाल यह है कि 100 एमएलडी पानी कैसे मापा गया, जबकि ऐसा कोई संयंत्र नहीं है।