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मिडिएशन सेंटर रखा जाए दारुलकजा का नाम: फैज

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सुप्रीम कोर्ट की अधिवक्ता फरहा फैज दूसरे दिन भी आईं मीडिया के सामने, उलमा की टिप्पणी का दिया जवाब
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बोलीं: शरई अदालत के काम से नहीं इसके नाम पर आपत्ति
फोटो संख्या 4
अमर उजाला ब्यूरो
देवबंद(सहारनपुर)। सुप्रीम कोर्ट की अधिवक्ता फरहा फैज सोमवार को फिर से मीडिया के सामने आईं और देवबंदी उलमा द्वारा की गई टिप्पणी का जवाब देते हुए कहा कि वह अपना काम अच्छे से कर रही हैं, इसलिए उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रसिद्धि की जरूरत नहीं है। इसके साथ ही उन्होंने शरई अदालत नाम पर आपत्ति उठाते हुए कहा कि उन्हें इसके काम से नहीं बल्कि नाम से दिक्कत है। दारुलकजा का नाम मिडिएशन सेंटर (समझौता केंद्र) होना चाहिए। अदालत नाम रखने का अधिकार किसी भी गैर सरकारी संगठन (एनजीओ) को नहीं है।
रणखंडी रोड पर हुई प्रेस कांफ्रेंस में फरहा फैज ने कहा कि दारुलकजा (शरई अदालत) जिस तरह का काम करती हैं उसके अनुसार उसका नाम मिडिएशन सेंटर रखा जाना चाहिए। क्योंकि एक देश और एक संविधान में दो-दो अदालतें नहीं हो सकतीं। तीन तलाक, बहुविवाह और ट्रिपल तलाक का विरोध करते हुए फरहा फैज ने कहा कि जिस तरह हिंदू और ईसाई मैरिज एक्ट बना हुआ है उसी तरह मुस्लिम मैरिज एक्ट का होना भी जरूरी है। उन्होंने कहा कि मुस्लिम बच्चे मदरसों तक सीमित न रहकर उच्च शिक्षा ग्रहण कर मुख्यधारा से जुड़े इसके लिए उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर मांग की है कि देश में ऐसा विश्वविद्यालय स्थापित किया जाए जहां धार्मिक शिक्षा के साथ साथ आधुनिक शिक्षा भी दी जाए। एक सवाल पर फरहा फैज ने कहा कि उनका राजनीति में आने का कोई इरादा नहीं है। बल्कि उनका मकसद मजबूती के साथ महिलाओं के हकों की लड़ाई लड़ना है। जिसके लिए वह लगातार काम कर रही हैं। इस दौरान भाजपा नगर अध्यक्ष गजराज सिंह राणा, विनोद वर्मा, ठा. सुरेंद्रपाल सिंह आदि मौजूद रहे।
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फरहा के बयान पर भड़के देवबंदी उलमा
बोले, फरहा को मुस्लिम धर्मगुरुओं पर गलत टिप्पणी नहीं करनी चाहिए, उलमा से वह माफी मांगें
फोटो संख्या 5
अमर उजाला ब्यूरो
देवबंद(सहारनपुर)। सुप्रीम कोर्ट की अधिवक्ता फराह फैज द्वारा देवबंद में आकर दारुल उलूम और मुस्लिम धर्मगुरुओं पर बयानबाजी को लेकर देवबंदी उलमा ने सख्त नाराजगी का इजहार करते हुए कहा कि फराह को उलमा से माफी मांगनी चाहिए। उन्होंने सरकार से फरहा फैज पर कार्रवाई किए जाने की मांग भी की है।
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सुप्रीम कोर्ट में तीन तलाक, बहुविवाह और हलाला को लेकर मुस्लिम महिलाओं की लड़ाई लड़ रहीं फरहा फैज ने रविवार को बयान दिया था कि दारुल उलूम की विचारधारा के मदरसे आतंक की शिक्षा देते हैं। साथ ही उन्होंने यह भी कहा था कि अगर उलमा की फतवों की दुकान बंद हो गई तो उनके पास कुछ नहीं बचेगा। फराह फैज की गलत बयानबाजी को लेकर मजलिस इत्तेहाद-ए-मिल्लत के प्रदेशाध्यक्ष मुफ्ती अहमद गौड ने कहा कि संविधान में मुसलमानों का पूरा विश्वास है और संविधान ने ही उन्हें धर्म के अनुसार जीवन गुजारने का अधिकार दिया हुआ है। हमें कोई भी गलत काम करने के लिए बाध्य नहीं कर सकता। कहा कि फरहा फैज वकील है वो केवल वकालत करें। मजहब में दखलअंदाजी न करें। उन्हें इस्लाम धर्म का जरा भी ज्ञान नहीं है और वह देवबंद में आकर दारुल उलूम और मुस्लिम धर्मगुरुओं को लेकर गलत बयानबाजी कर रही हैं जिसके लिए उन्हें उलमा से माफी मांगनी चाहिए। साथ ही मुफ्ती अहमद गौड़ ने कहा कि दारुल उलूम और उलमा का नाम लेकर सस्ती लोकप्रियता हासिल करने वाली फरहा फैज के बयान नफरत और घृणा पैदा करने वाले हैं जिनसे मुल्क का माहौल खराब हो सकता है। इसलिए सरकार को चाहिए कि वह फरहा फैज पर कार्रवाई करे।
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