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बोर्ड बैठक में तीन मिनट में करोड़ों के प्रस्ताव पास

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सहारनपुर। नगर निगम बोर्ड की बैठक हंगामों के नाम रही। पहले दो पार्षदों में कुर्सी को लेकर तीखी नोकझोंक हुई तो बाद में पार्षदों ने सुनवाई न होने की पीड़ा रखी और हंगामा किया। हंगामे की वजह से बैठक मात्र तीन मिनट में खत्म करनी पड़ी। इतना ही नहीं, इन तीन मिनट में करोड़ों रुपये के 65 प्रस्तावों को पास कर दिया गया।
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सर्किट हाउस सभागार में बैठक अपराह्न तीन बजे शुरू होनी थी। जैसे ही पार्षदों ने सदन में एंट्री की तो कुर्सी को लेकर पार्षदों के दो गुटों में नोकझोंक शुरू हो गई, जो हाथापाई तक पहुंच गई। दरअसल, सदन में 70 पार्षदों के लिए कुर्सियां पर्याप्त नहीं थीं। ऐसे में पहले आने वाले पार्षद गद्दे लगी लकड़ी की कुर्सियों पर बैठ गए, जबकि बाद में आए पार्षदों के लिए प्लास्टिक की कुर्सियां बचीं। वार्ड संख्या 17 के पार्षद नरेश सिंह रावत आगे बैठे हुए थे। इसी दौरान वार्ड संख्या 68 के पार्षद इमरान सैफी पीछे से प्लास्टिक की कुर्सी उठाकर आगे आने लगे, जिस पर रावत ने आपत्ति जताई। इसे लेकर दोनों के बीच बहस शुरू हो गई। देखते ही देखते दोनों ओर से और पार्षद जुड़ते चले गए। अंतत: महापौर को अपनी कुर्सी से उठकर दोनों के बीच जाकर उन्हें शांत कराना पड़ा। इसके बाद बोर्ड की बैठक में पहली बार शामिल हो रहे नगर विधायक संजय गर्ग ने सदन को संबोधित किया और शहर के विकास को लेकर अपनी बात रखी। उन्होंने कचरा प्रबंधन और जल संरक्षण के लिए योजनाबद्ध तरीके से कदम उठाने की मांग की। विधायक के संबोधन के बाद जैसे ही महापौर संजीव वालिया ने बैठक की कार्यवाही शुरू की तो वार्ड 45 के पार्षद हाजी बहार अहमद ने अपनी बात रखी। उनका आरोप था कि नगर निगम के अधिकारी उनकी सुनते नहीं हैं। वह अपने क्षेत्र की सड़क की मांग कई बार एक्सईएन के सामने रख चुके हैं, मगर एक्सईएन उनका फोन काट देते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि उनकी सुनवाई नहीं होने से जनता के काम नहीं हो रहे हैं और जनता नाराज है। इस पर महापौर का कहना था कि पहले एजेंडे पर बहस हो जाए उसके बाद सभी पार्षदों की समस्या सुनी जाएगी। इस पर बसपा पार्षद दल के नेता और वार्ड संख्या 16 से पार्षद चंद्रजीत सिंह निक्कू खड़े हो गए और हंगामा शुरू कर दिया। उनका कहना था कि पहले पार्षदों की सुनी जाएगी, बाद में एजेंडे पर बात होगी। उनके विरोध में भाजपा के अनेक पार्षद खड़े हो गए। निक्कू ने महापौर पर ठेेकों में कमीशन लेने का आरोप लगाते हुए कार्रवाई की मांग की। हंगामे के बीच महापौर ने प्रस्ताव संख्या 25 से 90 तक को सर्वसम्मति से पास घोषित कर दिया। साथ ही बैठक समाप्ति की भी घोषणा कर की। ज्यादातर प्रस्ताव अलग-अलग वार्डों में नालों, नालियों और सड़कों की सफाई से संबंधित रहे। देहात विधायक मसूद अख्तर भी बैठक में पहुंचे। बैठक में नगरायुक्त ज्ञानेंद्र सिंह, चीफ इंजीनियर जितेंद्र केन, नगर स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. एके त्रिपाठी समेत नगर निगम के तमाम अधिकारी और कर्मचारी भी मौजूद रहे।
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बोर्ड बैठक में पास हुए प्रमुख प्रस्ताव
-परिवहन निगम को बस अड्डे के लिए मानकमऊ में पड़ी जमीन को 30 साल के लिए पट्टे पर देना।
-नगर निगम की दुकानों के किराये में 50 फीसदी की बढ़ोत्तरी और नामांतरण शुल्क दस हजार रुपये करना।
-गृह और जल कर वसूली में छूट और ब्याज लगाने की तैयारी।
-शहर को हरा भरा बनाने के लिए 15 हजार पौधे लगाना।
-नाले और नालियों की सफाई के लिए सफाई श्रमिकों की भर्ती आदि।
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समितियों की अनदेखी कर रहा नगर निगम
नगर निगम में केवल पार्षदों ही नहीं, बल्कि अनेक प्रस्तावों के संदर्भ में बनाई गई समितियों को भी अनदेखा किया जा रहा है। इसका बेहतर उदाहरण प्रस्ताव संख्या 07 है, जो जल निगम से जुड़े कार्यों से संबंधित है। इसके सही क्रियान्वयन के लिए एक समिति बनाई गई थी, जिसमें पार्षद मंसूद बदर और भूरा सिंह के साथ ही नगर विधायक संजय गर्ग को भी शामिल किया गया था। आरोप है कि समिति बनने के ढाई महीने बाद भी उक्त प्रस्ताव पर काम कर रहे नगर निगम के अधिकारियों ने समिति सदस्यों से बात तक नहीं की है। मंसूद बदर ने इसपर आपत्ति जताई। उन्होंने बताया कि समिति को संज्ञान में लिए बिना ही काम के लिए करोड़ों रुपये भी जारी कर दिए गए। उन्होंने प्रस्ताव संख्या 22 पर भी पुनर्विचार करने की मांग की। पार्षद शाहीन नौशाद ने प्रस्ताव संख्या 31 से 40 तक के टेंडर निरस्त करने की मांग उठाई। लिखित में भी महापौर को सौंपा है।
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बोर्ड बैठक में राष्ट्रगान का अपमान
नगर निगम बोर्ड बैठक के समापन पर राष्ट्रगान हुआ। राष्ट्रगान के दौरान सावधान की पोजिशन होनी चाहिए, मगर ज्यादातर पार्षदों ने ऐसा नहीं किया। पार्षद ही नहीं नगर निगम के भी अनेक कर्मचारी राष्ट्रगान के दौरान अपनी बातों में व्यस्त नजर आए। जिसे लेकर बैठक के बाद भी चर्चा रही।
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महापौर नगर निगम के ठेकों में कमीशन ले रहे हैं, जिसकी हम निंदा करते हैं। मैंने बोर्ड बैठक में महापौर का काला चिट्ठा खोलना चाहा, मगर उन्होंने अपने पार्षदों से हंगामा कराकर मेरी बात को दबाने का प्रयास किया और मनमर्जी से प्रस्ताव पास कर लिए। भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई जारी रहेगी।
चंद्रजीत सिंह निक्कू, बसपा पार्षद।
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बोर्ड की बैठक में सभी 65 प्रस्तावों को सर्व सम्मति से पास कर दिया गया है। ज्यादातर प्रस्ताव साफ सफाई से जुड़े थे। बसपा पार्षद चंद्रजीत सिंह निक्कू द्वारा लगाए गए आरोप पूरी तरह बेबुनियाद हैं। उनके वार्ड में ज्यादातर क्षेत्र रेलवे का है, जिसमें उन्हें काम तो कुछ करना नहीं है। मेरा प्रयास यही रहता है कि एक-एक प्रस्ताव पर चर्चा हो, मगर कुछ लोगों का काम केवल हंगामा खड़ा करना है।
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संजीव वालिया, महापौर।
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