सहारनपुर। पिछले 10 महीने से सहारनपुर सहित पूरे वेस्ट यूपी में अवैध कटान पर लगे अंकुश की वजह से देहात से लेकर शहर तक के कुत्तों का पेट नहीं भर रहा है। अवैध कटान के बाद निकलने वाले अवशेष गांव-देहात में इधर उधर फेंके जाते थे और उन्हें खपाने के लिए गांवों में कुत्ते ही आसान और सुलभ साधन बने रहते थे। इससे कुत्तो ंको अपना आहार मिलता था। मगर अब अवैध कटान बंद होने के बाद भूख से बेहाल कुत्तों के लिए सबसे सॉफ्ट टारगेट बच्चे हैं।
जानकारों का मानना है कि मीट की उपलब्धता कम होने की वजह से कुत्तों का पेट पूरी तरह से नहीं भर पा रहा है। उधर, आवारा कुत्तों की पापुलेशन भी तेजी से बढ़ रही है। ऐसे में उनके सामने पेट भरने का संकट होता है और सबसे बड़ी बात यह है कि मांसाहारी कुत्तों का पेट मीट से ही भरेगा। ऐसे में वे आदमी के मांस से परहेज नहीं करते। मगर, इसके लिए वे सॉफ्ट टारगेट तलाशते हैं।
पशु चिकित्सक पवित्रजीत सिंह बताते हैं कि कुत्ते आमतौर पर जंगली जानवर की श्रेणी में आते हैं और उनका मुख्य आहार मीट ही होता है। पिछले लंबे समय से अवैध कटान की वजह से आवारा कुत्तों को आसानी से मांस नहीं मिल रहे। मगर अब उनका पेट नहीं भर रहा है तो मांस की तलाश में वे आदमी को अपना निशाना बना रहे हैं। उनके खूंखार होने के पीछे बढ़ी हुई जनसंख्या और उनका झुंड बड़ा कारण है। झुंड में होने की वजह उनका पेट पूरी तरह से नहीं भरता और खाने को लेकर आक्रामक रहते हैं। उनका कहना है कि तेंदुआ और अन्य पशु भी पूरी तरह से पेट नहीं भरने के कारण ही नरभक्षी होते हैं।