मां बगलामुखी दुर्गा का महाविद्या रूप: चैतन्य
सहारनपुर। समर्थश्री व्यम्केश्वर चैतन्य महाराज ने कहा कि मां बगलामुखी तंत्र की देवी नहीं बल्कि जगतमाता दुर्गा का महाविद्या रूप है। मां बगलामुखी जगत का कल्याण करती है और पग-पग पर अपने भक्त की रक्षा करती हैं।
ब्रह्मपुरी कालोनी स्थित सिद्धपीठ श्री बगलामुखी मंदिर में चल रही श्रीमद्भागवत कथा को रविवार को विश्राम किया गया। देव पूजन मंदिर अधिष्ठाता आचार्य रोहित वशिष्ठ ने यजमानों के साथ यज्ञ में पुर्णाहुति दी। कथा व्यास समर्थश्री व्यम्केश्वर चैतन्य महाराज ने कहा कि जो अज्ञानी मां बगलामुखी को तंत्र की देवी मानते हैं, वे स्वयं को धोखा दे रहे हैं। दुर्गम नामक दैत्य का संहार करने के लिए इसी सहारनपुर के मां शाकंभरी देवी क्षेत्र में मां जगदंबा शताक्षी, शाकंभरी के रूप प्रकट होकर ब्राह्मण एवं देवताओं की क्षुधा निवृत्ति करती हैं। दुर्गम दैत्य के वध के लिए मां दुर्गा के दिव्य शरीर में 10 महाविद्याओं का प्रकाट्य होता है। उन्हीं 10 महाविद्याओं में से मां भगवती बगलामुखी आठवीं महाविद्या है। मां बगलामुखी अपने भक्त की रक्षा के लिए सदैव तत्पर रहती है और भक्त की पग-पग पर रक्षा करती हैं।
इस दौरान गोवर्धन दास धीमान, प्रवीन तायल, विनोद कश्यप, जसवंत सिंह चौहान, अर्चित अग्रवाल, राजवीर सिंह, निखिल त्यागी, मनमोहन शर्मा, विपिन शर्मा, सुशीला देवी, रजनीकांत अग्रवाल, कोटिल्य धीमान, प्रमोद वशिष्ठ, राकेेश शर्मा, राजकुमार शर्मा, राहुल, अरूण शर्मा, सुंदरपाल धीमान, संगीता, रीना त्यागी, महेंद्र चौधरी, शशी नेगी, मुनेश यादव, रेखा शर्मा, रजनी पुंडीर, करूणा गोयल, प्रकृति त्यागी, राखी चौधरी, विरेंद्र सैनी, रणजीत सिंह, सपना चौधरी, सूरज प्रकाश शर्मा, रमेश पटवारी मौजूद रहे।