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स्मार्ट सिटी की सड़कों पर चल रही डेयरियां

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स्मार्ट सिटी की सड़कों पर चल रही डेयरियां
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सहारनपुर। जिस तरह से शहर की सड़कों पर आवारा और पालतू पशुओं का आतंक है। उससे लगता नहीं है कि सहारनपुर स्मार्ट सिटी बनने की ओर अग्रसर है। जी हां! खुंखार कुत्ते बच्चों पर हमला कर रहे हैं तो सड़कों पर विचरण करने वाले आवारा पशु भी मुसीबत बन गए हैं। अन्य जानवर गली मोहल्लों में घुसकर लोगों को परेशान कर रहे हैं। इन सब घटनाओं के बावजूद अधिकारी बेपरवाह बने हुए हैं। सड़कों पर चल रही डेयरियां और ये आवारा पशु स्मार्ट सिटी की सूरत बिगाड़ रहे हैं।
नगर निगम का स्वास्थ्य विभाग पिछले दो साल में तीन से चार बार चेतावनी जारी कर चुका है। मगर आज तक पशुओं को पकड़कर जब्त करने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं। नतीजा यह है कि शहर की सड़कों पर गोवंश, खुंखार कुत्ते, बीमार घोड़े और अन्य जानवर खुले घूम रहे हैं, जो हादसों की वजह बनने के साथ ही शहर को गंदा भी कर रहे हैं। इतना ही नहीं, वर्षों से अनेक डेयरियां भी सड़कों पर से चल रही हैं। चकराता रोड पर पुरानी चुंगी से बेहट बस अड्डा तक बड़ी संख्या में पशुओं को सड़क पर बांधा जा रहा है। मंडी समिति क्षेत्र में भी बड़ी संख्या में पशुओं को सड़कों पर ही बांधा जा रहा है। इसके अलावा प्रतिदिन डेयरियों के संचालक दर्जनों की संख्या में भैंसों को सड़कों पर छोड़कर चराने के लिए शहर से बाहर ले जाते हैं। इससे जाम लग जाता हैं। कई बार खुली भैंसें सड़क हादसों की वजह भी बनती हैं। बेहट रोड इसका बेहतर उदाहरण है। करीब चार साल पहले नगर निगम ने सड़कों पर चलने वाली करीब डेढ सौ डेयरियों को चिन्हित किया था, जिन्हें नोटिस भी जारी किए गए थे, मगर कार्रवाई आज तक नहीं हो सकी है।
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पशुओं से हो रही शहर में गंदगी
सड़कों पर चल रही डेयरियों की वजह से गोवंश और भैंसें सड़कों पर ही गंदगी फैलाती हैं। इसकी वजह से सड़कों पर दुर्गंध रहती है और राहगीरों को परेशानी होती है। बेहट अड्डा निवासी राजीव और मयंक ने बताया कि वह कोर्ट रोड पर जॉब करते हैं, महाराज सिंह कॉलेज के सामने से गुजरते हुए गोबर की दुर्गंध आती है। उन्होंने बताया कि वह वर्षों से इस दुर्गंध को झेल रहे हैं, मगर नगर निगम आज तक कार्रवाई नहीं कर सका है। इसके अलावा शहर में चल रही डेयरियों से निकलने वाले गोबर को डेयरी संचालक बोगियों भरकर शहर से बाहर निगम क्षेत्र में ही कॉलोनियों के खाली प्लॉटों में डाल रहे हैं, जिसकी वजह से क्षेत्रवासी परेशान हैं। बरसात के दिनों में गोबर और दुर्गंध छोड़ रहा है। शकलापुरी मार्ग और पुराना कलसिया रोड पर भारी मात्रा में गोबर डाला जा रहा है।
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घोड़ों से जानलेवा बीमारी फैलने का खतरा
घोड़ों में ग्लाइंडर्स की बीमारी फैल रही है। सहारनपुर में कुछ घोड़ों में बीमारी के लक्षण पाए गए थे। प्रशासन ने अलर्ट जारी किया था। साथ ही बीमारी से ग्रस्त घोड़ों को मरवाया था। इन दिनों शहर में बड़ी संख्या में सड़कों पर बीमार घोड़े विचरण कर रहे हैं, जिनका यह नहीं पता है कि उनको कौन सी बीमारी है और क्यों छोड़ा गया है। चूंकि ग्लाइंडर्स घोड़ों से इंसानों में फैलने वाली जानलेवा बीमारी है। ऐसे में सड़कों पर विचरण कर रहे बीमार घोड़ों को शहर से बाहर किया जाना बेहद जरूरी है। करीब 20 दिन पहले सड़क पर खड़े एक घोड़े ने दो बुजुर्गों को काट लिया था। अमर उजाला ने प्रमुखता के साथ समाचार को प्रकाशित किया था। मगर प्रशासन और नगर निगम ने अभी तक कोई कदम नहीं उठाया है।
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निगम के पास नहीं कांजी हाउस
शहर को नगर निगम बने दस वर्ष बीत चुके हैं। अब स्मार्ट सिटी में चयन को भी करीब सात महीने बीत चुके हैं। मगर नगर निगम आज तक कांजी हाउस की व्यवस्था नहीं कर सका है। यही वजह है कि नगर निगम गोवंश को पकड़ने से कतराता रहा है। कांजी हाउस बनाने के लिए नगर निगम अब प्रयास में है।
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सड़कों पर विचरण करने वाले गोवंश को पकड़ने के लिए नगर निगम ने अभियान चलाया हुआ है। हम गोवंश को पकड़कर गोशाला में रख रहे हैं, जिनको स्वामी द्वारा छुड़वाने पर जुर्माना वसूला जाता है। डेयरियों और सभी तरह के पशुओं के फॉर्म को शहर से बाहर करने के लिए नोटिस जारी किए गए हैं। यदि डेयरियों और पशु फार्मों को शहर से बाहर नहीं ले जाता है तो नगर निगम जरूरी कार्रवाई करेगा।
डॉ. एके त्रिपाठी, नगर स्वास्थ्य अधिकारी।
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