फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

सुप्रीम कोर्ट का फैसला हार-जीत का नहीं हक और इंसाफ का फैसला: उलमा

विज्ञापन
विज्ञापन
सुप्रीम कोर्ट का फैसला हार-जीत का नहीं हक और इंसाफ का फैसला: उलमा
विज्ञापन

देवबंद (सहारनपुर)। विश्व हिंदू परिषद के अंतरराष्ट्रीय संगठन मंत्री दिनेश चंद्रा के राम मंदिर पर दिए बयान पर देवबंद उलमा का कहना है कि इस तरह के लोगों ने हमेशा देश को तोड़ने की बात की है। अयोध्या के मामले में सुप्रीम कोर्ट का फैसला न मानने वालों को दहशतगर्द कहना चाहिए।
विज्ञापन

अयोध्या के एक कार्यक्रम में विहिप के संगठन मंत्री दिनेश चंद्र ने कहा कि अगर कोर्ट का फैसला राम मंदिर के पक्ष में नहीं होता तो ऐसे में हिंदू समाज एक बार फिर रामलला के भव्य मंदिर निर्माण के लिए लड़ाई शुरू करेगा। इस पर मदरसा जामिया हुसैनिया के वरिष्ठ उस्ताद मौलाना मुफ्ती तारिक कासमी का कहना है कि दिनेश चंद्र और उन जैसे लोग सुप्रीम कोर्ट के फैसले से पहले इस तरह की बयानबाजी करके देश में सांप्रदायिकता फैलाना चाहते हैं। विहिप ने हमेशा से देश, इंसानियत और आपसी सौहार्द को तोड़ने की कोशिशों के अलावा ओर किया क्या है? उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला गवाह और सबूतों की बुनियाद पर होता है जिसके सबूत पक्के होंगे फैसला भी उसी के हक में आएगा। इसका यह मतलब बैठता है कि अदलिया (अदालत) ने जिसका हक था उसको दे दिया। इसमें किसी भी तरह के विवाद की गुंजाइश नहीं बचती। मुफ्ती तारिक ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले को हार जीत से जोड़कर न देखा जाए। बल्कि यह हक और इंसाफ का मामला है। साथ ही उन्होंने दो टूक यह भी कहा कि अगर कोई सुप्रीम कोर्ट के फैसले को नहीं मानता तो उसे दहशतगर्द कहा जाए तो कोई बुराई नहीं है।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें