बेहट (सहारनपुर)। सिद्धपीठ शाकंभरी देवी मंदिर मालिकाना हक को लेकर चल रहे मामले में भूरा देव मंदिर के पंडा आशुतोष शर्मा और अभिषेक शर्मा को जिला सिविल न्यायालय ने राहत देते हुए उप जिलाधिकारी बेहट को शाकंभरी देवी मंदिर से जुड़ी संपत्ति का रिसीवर नियुक्त किया है। इससे राणा परिवार को एक झटका लगा है।
उत्तरांचल के देहरादून निवासी अभिषेक शर्मा एवं आशुतोष शर्मा द्वारा सिविल न्यायालय सहारनपुर में 25 मई 2007 को एक वाद दायर किया था। जिसमें कहा गया था कि शाकंभरी मंदिर के जिम्मेदार ज्वाला दत्त के पूर्वजों के जमाने से है। यह पंडित ज्वालादत्त एवं उसके पूर्वजों का अपना प्राइवेट मंदिर रहा है। वही मंदिर के पंडा थे। नागलमाफी के अंतर्गत आने वाले शाकंभरी देवी मंदिर क्षेत्र के रकबे को रिजर्व फारेस्ट घोषित करने के बाद भी शाकंभरी देवी मंदिर पर पंडित ज्वाला दत्त का ही कब्जा रहा है। वही पूजा-पाठ करते आ रहे थे। पंडित ज्वालादत्त के स्वर्गवास के बाद उनके पुत्र मंगलसेन फिर उनकी पुत्री दुर्गा देवी और दुर्गा देवी के पुत्र जयप्रकाश शर्मा ही मंदिर का रखरखाव करते रहे। पंडित जय प्रकाश शर्मा देहरादून के रहने वाले थे उन्होंने इस मंदिर की जिम्मेदारी और रखरखाव किया। साथ ही रानी देवलता जसपुर को एक अनुबंध 25 अक्टूबर 1966 किया जिसके तहत शाकंभरी देवी में लगने वाले मेले एवं श्रद्धालुओं के चढ़ावे में से सभी खर्च निकालकर जो बचेगा उसमें से 3/4 राणा परिवार को और 1/3 हिस्सा जयप्रकाश शर्मा को दे दिया जाएगा। परंतु ऐसा नहीं हुआ। पंडित जय प्रकाश शर्मा के मरणोपरांत पूरी तरीके से मंदिर पर रानी देवलता का कब्जा हो गया । जब भी उनके पुत्रों आशुतोष शर्मा और अभिषेक शर्मा ने मंदिर के चढ़ावे के बारे में जानकारी कि उन्होंने कुछ नहीं बताया गया और न ही कोई हिसाब दिया। इस मामले में मंगलवार को सिविल न्यायालय जज सहारनपुर महेश वर्मा द्वारा मुकदमे के दौरान शाकंभरी देवी मंदिर से जुड़ी संपत्ति के लिए उपजिलाधिकारी बेहट को रिसीवर नियुक्त किया है। उधर रानी देवलता द्वारा दायर याचिका में कहना है कि उनका अपना प्राइवेट मंदिर है । उनका किसी के साथ कोई अनुबंध नहीं हुआ, उनका किसी से कोई वास्ता नहीं, मंदिर उनका ही है।