देवबंद (सहारनपुर)। जेएनयू के छात्र उमर खालिद के देवबंद में हुए कार्यक्रम को लेकर सियासी बयानबाजी तेज हो गई हैं। बीजेपी विधायक और सांसद समेत हिंदू संगठनों के लोगों ने इसका विरोध किया तो अब सपा के पूर्व विधायक माविया अली उमर खालिद के समर्थन में आ गए हैं। उनका कहना है कि उमर खालिद ने लोकतंत्र को मजबूत करने की बात कही तो इसमें कौन से दिक्कत हो गई। उन्होंने कहा कि गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर गोष्ठी का आयोजन होना परंपरा का हिस्सा रहा है। इसमें किसी को कोई परेशानी नहीं होनी चाहिए।
मंगलवार को पूर्व विधायक माविया अली ने कहा कि गणतंत्र दिवस या स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या से लेकर राष्ट्रीय पर्व मनाने के दिन पांच बजे तक किसी भी कार्यक्रम को करने के लिए कोई प्रतिबंध नहीं है। पूर्व संध्या पर गोष्ठी आदि का आयोजन होना परंपरा का हिस्सा रहा है और हमेशा से ऐसा होता रहा है। उमर खालिद 25 जनवरी को जिस कार्यक्रम में आए उसमें परेशानी वाली कोई बात ही नहीं है। उमर हिंदुस्तान के नागरिक हैं और उन्होंने कार्यक्रम में शिरकत कर लोकतंत्र को मजबूत करने की बात की तो कौन से दिक्कत हो गई। उन्होंने कहा कि जितने भी हिंदू संगठन हैं चाहे वे विश्व हिंदू परिषद हो या आरएसएस हो इन लोगों की उन सबसे दुश्मनी है जो लोकतंत्र की रक्षा करना चाहते हैं। आरोप लगाया कि इन लोगों ने 52 साल तक खुद तिरंगा नहीं फहराया और दूसरों पर यह इल्जाम लगाने के लिए तैयार रहते हैं कि ये देशभक्त नहीं हैं, ये तिरंगा नहीं फहराते। उन्होंने कहा कि लोगों को आपस में लड़वाना और वोटों का ध्रुवीकरण करना यही उनकी सोच है। माविया ने यह भी आरोप लगाया कि सांसद राघव लखनपाल, क्षेत्रीय विधायक कुंवर ब्रिजेश सिंह, भाजपा और आरएसएस तिरंगे की जगह भगवा झंडे को गणतंत्र दिवस और स्वतंत्रता दिवस पर फहराना चाहते हैं। यह बात कासगंज की घटना ने सिद्ध कर दी है। यह लोग माहौल को खराब करने वाले लोग हैं। उमर खालिद के आने से किसी भी प्रकार का कोई माहौल खराब नहीं हुआ। उन्होंने वही बात कही जो खुद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कही थी। साथ ही कहा कि गौरी लंकेश पर आपत्तिजनक टिप्पणी करने वालों को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी फालो करते हैं । माविया अली ने यह भी कहा कि देवबंद एक लोकतांत्रिक जगह है उमर खालिद, जिग्नेश मेवाणी, हार्दिक पटेल जैसे नौजवानों को देवबंद आना चाहिए और अपनी बात कहनी चाहिए।