ई-वे बिल के लिए जरूरी दिशा-निर्देश दिए
सहारनपुर। वाणिज्य कर विभाग के एडिशनल कमिश्नर ग्रेड-1 अनिल कुमार पाठक की ओर से केंद्रीय ई-वे बिल प्रणाली के बारे में दिशा-निर्देश दिए गए हैं। उनके मुताबिक एक फरवरी से केंद्रीय ई-वे बिल व्यवस्था आरंभ होते ही प्रदेश में पहले से प्रचलित ई-वे बिल एवं बहती और पंजीकृत व्यापारियों के लिए डाउनलोड की जाने वाली ई-वे बिल व्यवस्था स्वत: ही समाप्त हो जाएगी। राज्यीय एवं अंतरराज्यीय संव्यवहार के लिए नेशनल ई वे बिल लागू होगा। इसमें 50 हजार रुपये से अधिक के माल का परिवहन करने पर ई-वे बिल अनिवार्य होगा। यदि माल का गंतव्य परिवहन स्थल के 10 किलोमीटर के अंदर है तो वे बिल जनरेट करना जरूरी नहीं है।
एडिशनल कमिश्नर ने बताया कि यह बिल जीएसटी के कॉमन पोर्टल पर पंजीकृत व्यापारी तथा ट्रांसपोर्टर के द्वारा माल का परिवहन पर आरंभ किया गया है। उन्होंने बताया कि परिवहन करते समय वाहन स्वामी के पास उपलब्ध नंबर अथवा प्रिंट आउट में वही नंबर अंकित होना जरूरी है, जिसके द्वारा परिवहन किया जा रहा है। वाहन के पलटी होने की स्थिति में नए वाहन संख्या को अंकित करने की सुविधा ऑनलाइन उपलब्ध है। यदि किसी आपूर्तिकर्ता के पास माल को ट्रांसपोर्टर के गोदाम तक भेजते समय वाहन नंबर उपलब्ध नहीं है तो वह केवल भाग ए को पूरा करके माल को प्रेषित किया जा सकता है।
उन्होंने बताया कि भाग-ए में उपलब्ध ट्रांसपोर्ट डिटेल्स, फील्ड में ट्रांसपोर्ट का नाम, ट्रांसपोर्टर की आईडी, परिवहन से संबंधित अभिलेख का नंबर तथा दिनांक अंकित करके माल को ट्रांसपोर्टर को भेजा जा सकता है। ट्रांसपोर्टर द्वारा लॉगिन कर भाग-बी में वाहन संख्या को अंकित करके ई वे बिल जनरेट किया जा सकता। यदि किसी अपंजीकृत व्यक्ति द्वारा 50 हजार से अधिक के माल का क्रय करके स्वयं के वाहन से उसका परिवहन किया जाता है तो ऐसी दशा में आपूर्तिकर्ता व्यापारी द्वारा ई-वे बिल जनरेट किया जा सकता है या अपंजीकृत व्यक्ति द्वारा ई-वे बिल पोर्टल पर स्वयं ऑनलाइन पंजीकरण करके जनरेट किया जा सकता है।
यदि किसी ई-वे बिल से संबंधित वैधता अवधि समाप्त हो गई है तो उसका परिवहन अमान्य होगा। अपरिहार्य परिस्थितियों में वैधता अवधि बढ़ाने का अधिकार कमिश्नर वाणिज्य कर विभाग को होगा। इसकी प्रक्रिया बाद में घोषित की जाएगी।