सहारनपुर। प्रशासन की लापरवाही ने सियासी दलों का गणित बिगाड़ दिया है। महानगर में हजारों मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से कटने पर जहां भाजपा के हिंदू मतों में कमी आई वहीं बसपा, कांग्रेस और सपा भी बेचैन नजर आ रही हैं। अब चुनाव के नतीजों को लेकर प्रत्याशियों की धड़कनें बढ़ गई हैं।
नगर निगम के चुनाव में प्रशासन की लापरवाही साफ उजागर हुई है। महानगर के दर्जनों क्षेत्रों में हजारों मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से गायब मिले। इस कारण हजारों लोग मताधिकार से वंचित रह गए। शहर की इंद्रा कॉलोनी, भूतेश्वरनगर, दक्षिणी शारदानगर, साकेश कॉलोनी, बड़तला यादगर, रामनगर पठानपुरा सहित कई इलाकों में हजारों लोग मतदान नहीं कर पाए। इन क्षेत्रों को भाजपा का गढ़ माना जाता है। इसके अलावा नदीम कॉलोनी, मंडी समिति मार्ग और चिलकाना रोड पर भी कुछ लोगों के नाम वोटर लिस्ट से गायब मिले। इस वजह से बसपा, कांग्रेस और सपा नेता भी बेचैन नजर आए। ऐसे में प्रत्याशियों की धड़कनें बढ़ गई हैं, जो लोग वोट डालने से वंचित रह गए, उनके लिए दिनभर प्रत्याशी भी भाग दौड़ करते नजर आए, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। जिलाधिकारी पीके पांडेय का कहना है कि जांच कराकर कार्रवाई की जाएगी।
कौन है जिम्मेदार?
सहारनपुर। सहारनपुर को 2008 में नगर निगम का दर्जा मिला था। नगर निगम के लिए पहली बार चुनाव हुआ और लोगों ने मेयर और पार्षद चुनने के लिए मतदान किया, लेकिन वोटर लिस्ट में बड़ा गड़बड़झाला हुआ। ऐसे में सवाल खड़ा होता है कि इसका जिम्मेदार कौन है? लोग सीधा आरोप बीएलओ पर लगा रहे हैं। आरोप है कि अधिकतर क्षेत्रों में बीएलओ ने घर-घर जाकर वोट नहीं बनाए। क्षेत्र के किसी एक राजनीतिक व्यक्ति के घर बैठकर ही वोटर लिस्ट तैयार की गई। राजनीतिक व्यक्ति ने अपने लाभ के लिए अपने हिसाब से मतदाताओं के नाम बीएलओ को बताए और इसी आधार पर मतदाता सूची तैयार की गई।
अधिकारियों पर गिर सकती है गाज
सहारनपुर। मतदाताओं के वोटर लिस्ट से नाम कटने की शिकायत लोगों ने प्रदेश सरकार से की है। कई लोगों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को ई-मेल भेजकर पूरे मामले से अवगत कराया। मतदाताओं के नाम कटने का नुकसान भी भाजपा को होता नजर आ रहा है। ऐसे में अधिकारियों पर गाज गिर सकती है।