सहारनपुर। होजरी कारोबार में भी सहारनपुर विख्यात है, लेकिन बाजार में आए चीन के उत्पादों ने सहारनपुर के इस कारोबार को ठंड लगा दी है। बीते दो साल में करीब 40 से 50 प्रतिशत तक गिरावट आई है, जिस कारण कारोबारियों को कड़ा मुकाबला झेलना पड़ रहा है।
वैसे तो सहारनपुर का वुड कार्विंग उद्योग दुनिया भर में मशहूर है, लेकिन यहां का होजरी उद्योग भी कम मशहूर नहीं है। आजादी के पहले से यहां पर होजरी उद्योग चल रहा है, जो 1950 में इस उद्योग को सही पहचान मिली। इसके बाद कच्छा-बनियान से लेकर जुराब, पैंटी और अन्य उत्पाद बनाने की छोटी छोटी इकाइयां यहां स्थापित हुईं। वर्तमान में छोटी बड़ी करीब 350 इकाइयां होजरी की चल रही हैं। इनमें बड़ी संख्या में ऐसी इकाइयां हैं, जो लोगों ने अपने घरों में भी स्थापित कर रखी हैं। यहां पर कॉटन से जुराब, बनियान सहित तमाम अंडर गारमेंट्स बनाए जाते हैं, लेकिन चीन के उत्पादों के मुकाबले सबसे ज्यादा चुनौती जुराब और पैंटी को मिली है।
इस कारोबार से जुड़े एवं होजरी मैन्यूफैक्चरिंग एसोसिएशन के वरिष्ठ उपाध्यक्ष मनजीत सिंह अरोड़ा के अलावा कारोबारी सचिन और संजय का कहना है कि दो साल पहले तक सहारनपुर के होजरी इकाइयों में रात और दिन में लगाकर 18 घंटे तक उत्पादन चलता था। जब से चीन के उत्पाद बाजार में आए हैं, तब से महज 8 से 10 घंटे ही मशीन चलती हैं। इस वजह से करीब 50 प्रतिशत तक व्यापार प्रभावित हुआ है।
इन जगहों पर होती है आपूर्ति
सहारनपुर के होजरी उत्पाद यमुनानगर, मुरादाबाद, ज्वालापुर, हरिद्वार, देहरादून, दिल्ली, लुधियाना, भोपाल, इंदौर सहित उत्तर भारत के विभिन्न राज्यों में सप्लाई किए जाते हैं। सहारनपुर के उद्यमी लुधियाना से धागा लाते हैं और यहां जुराब, पैंटी आदि बनाकर बाजार में सप्लाई करते हैं।
रंग, डिजाइन और नई तकनीक है चुनौती
चीन के उत्पाद और सहारनपुर होजरी के उत्पादों में सबसे बड़ा फर्क रंग, डिजाइन को लेकर माना जा रहा है। कारोबारी सचिन का कहना है कि चीन के उत्पादों में प्लास्टिक पिघलाकर बनाए गए धागे का इस्तेमाल किया जाता है, जो स्वास्थ्य के लिहाज से खतरनाक होता है, लेकिन रंग और डिजाइन के चक्कर में ग्राहक मोहित हो जाते हैं। वहीं, चीन नवीन तकनीक की मशीन प्रयोग करता है, जबकि सहारनपुर के होजरी कारोबारी दिल्ली से मशीनें मंगाते हैं, लेकिन वह उतनी कारगर नहीं होती हैं। हालांकि अब उद्यमी नवीन तकनीक की मशीनें भी लगा रहे हैं, जिससे बाजार में बदलाव की उम्मीद है।