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एथलीट्स पर संघ के शुल्क की मार, प्रतियोगिता का बहिष्कार

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सहारनपुर। 52वीं राज्य जूनियर बालक एवं बालिका एथलेटिक्स प्रतियोगिता दो और तीन सितंबर को लखनऊ में होगी। खास बात यह है कि प्रतियोगिता में हिस्सा लेने के लिए एथलेटिक्स संघ ने मोटा शुल्क रखा है, जिसे लेकर खिलाड़ियों में खलबली है। खिलाड़ियों को जिला एथलेटिक्स संघ के पास अलग और यूपी एथलेटिक्स संघ के पास अलग से शुल्क जमा कराना होगा। पैसा नहीं होने की वजह से कई खिलाड़ियों ने प्रतियोगिता में हिस्सा न लेने का निर्णय लिया है।
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प्रतियोगिता में 20 वर्ष से कम आयु के खिलाड़ी प्रतिभाग कर सकेंगे, जिनका चयन ट्रायल 25 अगस्त की सुबह डॉ. भीमराव आंबेडकर स्पोर्ट्स स्टेडियम में होगा। जिला एथलेटिक्स संघ के सचिव डॉ. एके गुप्ता ने बताया कि ट्रायल के दौरान खिलाड़ियों को जन्म प्रमाण पत्र और आधार कार्ड प्रस्तुत करना होगा। नामांकन फॉर्म चयन के दिन पूर्वाह्न 11 बजे तक स्वीकार किए जाएंगे। नामांकन फॉर्म के साथ जन्म प्रमाण पत्र, आधार कार्ड की छायाप्रति और पासपोर्ट आकार के फोटो लगाने होंगे। प्रत्येक इवेंट के लिए 200 रुपये शुल्क जमा करना होगा। एक खिलाड़ी अधिकतम दो इवेंट में हिस्सा ले सकता है, जिसके लिए उसे तीन सौ रुपये चुकाने होंगे। इसके बाद जब खिलाड़ी लखनऊ में प्रतिभाग करने जाएगा तो वहां 300 रुपये यूपी एथलेटिक्स संघ के पास अलग से जमा कराने होंगे। संघ के भारी शुल्क से गरीब और मध्यम वर्ग के खिलाड़ी परेशान हैं। स्टेडियम के ही कई खिलाड़ियों ने प्रतियोगिता में हिस्सा नहीं लेने का निर्णय लिया है। उनका कहना है कि वह गरीब परिवारों से ताल्लुक रखते हैं, जिनके पास 500 या 600 रुपये नहीं हैं। उन्होंने बताया कि प्रतियोगिता के लिए उनसे कम से कम 500 रुपये वसूले जाएंगे, जबकि जीत के बावजूद उनको मुश्किल से डेढ़ सौ रुपये का मेडल थमाया जाएगा।
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भीड़ कम करना और खर्च निकालने को है शुल्क
जिला एथलेटिक्स संघ के सचिव डॉ. एके गुप्ता ने बताया कि शुल्क उत्तर प्रदेश एथलेटिक्स संघ की ओर से निर्धारित किया गया है। शुल्क निर्धारित करने का मकसद ट्रायल में आने वाली भीड़ को कम करना है। यदि शुल्क नहीं रखेंगे तो इतने खिलाड़ी पहुंच जाएंगे, जिनका ट्रायल लेने में दो दिन लग जाएंगे। उन्होंने बताया कि इसी शुल्क में से चयनकर्ताओं और टीम के साथ जाने वाले मैनेजर को जाने-आने तथा रहने व खाने का खर्चा दिया जाता है।
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