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कृमि नियंत्रण के उपाय बताए

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अमरूद के पौधों में कृति नियंत्रण के लिए डिकंपोजर और निंबौली कारगर
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सहारनपुर। अमरूद के पौधों में लगने वाले निमिटोड सूत्र कृमि पर नियंत्रण के लिए वेस्ट डिकंपोजर और नीम की निंबौली कारगर साबित होगा। यह सूत्र कृमि पौधों की जड़ों में घुसकर गांठ बनाकर न सिर्फ उसकी पैदावार को प्रभावित करता है बल्कि बाद में सूखा तक देता है। बरसात के दिनों में निमेटोड अधिक प्रभावी रहता है।
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केवीके के प्रभारी और फसल सुरक्षा विभाग के प्रोफेसर डॉ. आईके कुशवाहा ने बताया कि निमेटोड को सूत्रकृमि के नाम से भी जाना जाता है। यह कृति धागे जैसा करीब एक से दो मिलीमीटर लंबा होता है। यह कृमि पौधों की जडों में प्रवेश करके रस चूसता रहता है। जिससे प्रभावित पौधे में गांठे बन जाती हैं। इन गांठों को माइक्रोस्कोप से देखने पर ही सूत्रकृमि दिखाई देते हैं। अमरूद के पौधों में सूखने की समस्या बढ़ती जा रही है। निमेटोड सूत्रकृमि के चलते पौधे की जड़ों में गांठें बन जाती है। इससे पहले पौधा पीला पड़ता है फिर ऊपर से सूखना शुरू हो जाता है। बरसात के दिनों में यह परेशानी अधिक सामने आ रही है। कृषि विज्ञान केंद्र के प्रभारी और फसल सुरक्षा विभाग के प्रोफेसर डॉ. आईके कुशवाहा ने बताया कि यह सूत्र कृमि जड़ों को काफी नुकसान पहुंचाता है। इससे प्रभावित पौधे में अन्य रोगकारक भी आसानी से प्रवेश कर जाते हैं। उन्होंने बताया कि इसकी रोकथाम के लिए वेस्ट डिकम्पोजर के 200 लीटर के घोल में दो किलो निंबौली कूटकर डालने के बाद सात दिन रखें। इसके बाद पौधों के जड़ों के चारों ओर थाला बनाकर डालें या फिर सिंचाई के साथ इनका प्रयोग करना फायदेमंद रहता है या प्रभावित पौधों के मुख्य तने से एक से दो मीटर की दूूरी पर थाला बनाकर 100 ग्राम फ्यूरॉडान और 50 से 100 ग्राम स्प्रिंट या कोर्बेन्डाजियम को मिटटी में मिलाकर थाले में पानी भरना मुफीद रहता है। इसके साथ ही कार्बेंडाजियम की दो ग्राम मात्रा को प्रति लीटर पानी में घोलकर छिड़काव भी करना चाहिए।
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