देवबंद (सहारनपुर)। आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के बयान कि अगर अयोध्या में राम मंदिर नहीं बनाया गया तो हिंदू संस्कृति की जडे़ं खत्म हो जाएंगी। उनका इस बयान पर देवबंदी उलमा ने सख्त नाराजगी का इजहार करते हुए इसे उकसाने वाला बयान करार दिया है।
मदरसा जामिया कासमिया दारुततालीम वस्सना के मोहतमिम मौलाना इब्राहीम कासमी ने कहा कि मोहन भागवत के बयान से जाहिर होता है कि पूर्व में दिए गए बयानों का सिलसिला एक सोची समझी साजिश है। मोहन भागवत से उन्हें इसी तरह के बयान की उम्मीद थी और वो उम्मीदों पर खरा उतरे हैं। उन्होंने कहा कि मोहन भागवत, श्रीश्री रविशंकर आदि धर्मगुरु अयोध्या विवाद को सुलझाने की एक दर्जन से अधिक कोशिशें कर चुके हैं, लेकिन इन कोशिशों के नाकाम होने की एक बड़ी वजह हिंदू संगठनों का अडियल रवैया है। हिंदुस्तान के तमाम मुसलमानों और मुस्लिम संगठनों का इस मुल्क की अदालत पर मुकम्मल भरोसा है। मुसलमानों ने ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के ऊपर अपना यकीन जाहिर करते हुए ये ऐलान किया हुआ है कि वे सुप्रीम कोर्ट के फैसले का सम्मान करेंगे। उन्होंने कहा कि मुस्लिम संगठन और तमाम मुस्लिम लीडर व धर्मगुरु पर्सनल लॉ बोर्ड के रुख का समर्थन करते हैं और बोर्ड के साथ खड़े हुए हैं। मौलाना इब्राहीम ने भागवत के बयान को अदालत की तौहीन बताते कार्रवाई किए जाने की मांग की है।
मक्का मस्जिद के आरोपियों को बरी किया जाना साजिश का हिस्सा: हसीब
देवबंद। हैदराबाद की एतिहासिक मक्का मस्जिद में हुए ब्लास्ट के आरोपियों को एनआईएन कोर्ट द्वारा बरी किए जाने पर देवबंदी उलमा ने नाराजगी जताई है। उलमा कहना है कि दोषियों को बरी किया जाना साजिश का हिस्सा है।
जमीयत उलमा-ए-हिंद के कोषाध्यक्ष मौलाना हसीब सिद्दीकी ने कहा कि पहले कर्नल पुरोहित, साध्वी प्रज्ञा समेत कई लोगों को बरी किया जाना और अब असीमानंद को सबूतों के अभाव में बरी किए जाने से साफ है कि यह पहले से रची हुई साजिश का हिस्सा है। क्योंकि केंद्र में बीजेपी हुकूमत बनने के बाद से ही एनआईए के तेवर बदल गए थे और उन्होंने अदालत में मुकदमे की ईमानदारी से पैरवी नहीं की। आरोपियों को सजा के लिए जो जरूरी सबूत थे उन्हें जान बूझकर पेश नहीं किया गया। जिसके चलते एक-एक करके सभी आरोपियों को बरी कर दिया गया। मौलाना हसीब ने कहा कि वो एनआईए की अदालत के फैसला का सम्मान करते हैं। लेकिन हिंदुस्तान की करोड़ों अमन पसंद अवाम यह चाहती है कि राष्ट्रीय जांच एजेंसी एनआईए अदालत के फैसले को हाईकोर्ट में चैलेंज करे। कहा कि अगर सरकार निचली अदालत के फैसले को हाईकोर्ट में चैलेंज नहीं करेगी तो पीड़ितों की ओर से जमीयत उलमा-ए-हिंद हाईकोर्ट जाने के लिए तैयार है। उन्होंने कहा कि मक्का मस्जिद बम धमाकों के आरोपियों का बरी होना इंसाफ और सिस्टम के लिए अफसोसनाक है।