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बोर्ड गठन के बावजूद जन सुविधाओं में सुधार नहीं

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सहारनपुर। बोर्ड गठन होने के बाद भी नगर निगम के अधिकारियों की कार्यप्रणाली में कोई बदलाव नहीं आया है। निगम के सभी कार्य पुराने ढर्रे पर चल रहे हैं। लोगों को बुनियादी सुविधाओं का लाभ नहीं पहुंच रहा है। आलम यह है कि लोग पेयजल, सीवर और सफाई को तरस रहे हैं, जिसकी वजह से उनकी परेशानी लगातार बनी हुई है।
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नगर निगम के गठन के करीब नौ वर्ष बाद शहर को संजीव वालिया के रूप में पहला महापौर और 70 पार्षद मिले। बोर्ड के गठन से पहले आरोप लगते रहे हैं कि नगर निगम के अधिकारी और कर्मचारी बेलगाम हैं। ऐसे में उम्मीद थी कि महापौर और पार्षद बेलगाम सिस्टम पर शिकंजा कस व्यवस्था में सुधार कराएंगे। मगर महापौर मिलने के करीब साढ़े चार महीने बाद भी नगर निगम के अधिकारियों और कर्मचारियों की कार्यप्रणाली में कोई सुधार नहीं हो सका है। साथ ही जन सुविधाओं में भी कोई बढ़ोत्तरी नहीं हो सकी है। बोर्ड गठन से पहले नगर निगम में करीब 27 फीसदी आबादी को पेयजल मुहैया करा रहा था, जिसका प्रतिशत आज भी लगभग वही है। सीवर लाइन की बात करें तो गऊशाला रोड पर सीवर लाइन डाली गई है, मगर लाइन डालने के करीब तीन महीने बाद भी सड़क पूरी तरह टूटी हुई है। सीवर लाइन डालने की वजह से सड़क कच्ची पड़ी है, जिस पर गड्ढे बने हुए हैं और लोगों को वाहन लेकर निकलने में परेशानी हो रही है। सीवर लाइन डालने की वजह से ही पुराना कलसिया रोड पिछले करीब छह महीने से टूटा हुआ है, जिसकी वजह से प्रतिदिन हजारों राहगीरों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। बता दें कि सीवर लाइन भी शहर के करीब 30 फीसदी क्षेत्र में ही है। इसके अलावा सफाई व्यवस्था में भी कोई खास सुधार नहीं है। तीन-तीन दिन में कूड़े का उठान होने की वजह से शहर में गंदगी फैली रहती है।
खर्च के लिए बड़ा बजट, वसूली में फिसड्डी
नगर निगम बोर्ड ने शहर के विकास के लिए 478 करोड़ रुपये का बजट पास किया है। मगर जानकर हैरानी होगी कि नगर निगम इनकम करने में फिसड्डी साबित हो रहा है। इसका बेहतर उदाहरण वित्तीय वर्ष 2016-17 में विभिन्न करों और किराये आदि से हुई आय है। नगर निगम लक्ष्य के सापेक्ष वसूली करने में पीछे रहा है। वर्ष 2016-17 में गृह और संपत्ति कर के रूप में 628.26 लाख रुपये की आय का लक्ष्य रखा गया था, जिसके सापेक्ष 394.82 लाख रुपये वसूले गए। जल कर के रूप में 589.12 लाख रुपये की आय का लक्ष्य था, जिसके सापेक्ष 431.73 लाख की वसूली की गई। सीवर कर के रूप में 69.18 लाख रुपये का लक्ष्य था, जिसके सापेक्ष मात्र 20.17 लाख रुपये की वसूली की गई। यानी कर वसूली में नगर निगम लगातार पिछड़ता रहा है। वर्तमान में भी कोई बदलाव अधिकारियों और कर्मचारियों की कार्यप्रणाली में नहीं आया है।
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जनता ने मुझे या पार्षदों को काम के लिए चुना है। मेरा पूरा फोकस इसी बात पर है कि जनता को अधिक से अधिक सुविधाएं दिलाई जाएं। रही बात नगर निगम के अधिकारियों और कर्मचारियों की कार्यप्रणाली में सुधार की तो सुधार तो आया है। जिसके परिणाम इसी साल सामने भी आएंगे कार्यों के रूप में।
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- संजीव वालिया, महापौर।
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