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भारत बंद पर बसपा सुप्रीमो ने मांगी रिपोर्ट

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सहारनपुर। दलितों के भारत बंद के आंदोलन के बाद बसपा सुप्रीमो ने जिले के पदाधिकारियों से आंदोलन का अपडेट मांगा है। जिस पर जिले के पदाधिकारियों से लेकर छोटे से छोटे कार्यकर्ता की सूची तैयार की जा रही है, जिसने आंदोलन में भागेदारी की। इस आंदोलन में दलितों के एकजुट होकर सामने आने से बसपा सक्रिय हो गई है और पदाधिकारियों को दलित संगठनों से संपर्क में रहने के निर्देश दिए गए हैं।
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वेस्ट यूपी में कमजोर माने जाने वर्ग ने दो अप्रैल को न सिर्फ अपनी ताकत दिखाई, बल्कि एकजुटता भी देखने को मिली। बिना किसी एक नेतृत्व में इतनी बड़ी संख्या में आंदोलन के लिए निकल कर सड़कों पर उतर जाने के चलते उस भीड़ को पुलिस और प्रशासन संभाल नहीं पाई। पूरा आंदोलन पुलिस और प्रशासन के नियंत्रण से बाहर रहा।
दलित संगठनों की इस एकता ने बसपा की सक्रियता को एक बार फिर बढ़ा दिया है। बसपा को अपना वोट बैंक वापस आता नजर आ रहा है। बसपाई सूत्रों के अनुसार भारत बंद पर पूरे वेस्ट यूपी से बसपा हाईकमान ने रिपोर्ट तलब की है। यह भी जानकारी मांगी गई है कि आंदोलन में कौन से पदाधिकारी और कार्यकर्ता शामिल रहे। बताया जा रहा है कि आंदोलन में शामिल होने के लिए पदाधिकारियों को पहले ही निर्देश दे दिए गए थे। बसपा हाईकमान ने आंदोलन में शामिल होने वाले पदाधिकारियों और छोटे से छोटे कार्यकर्ता का नाम समेत सूची मांगी है। जिससे यह पता चल सके कि बसपा के कितने कार्यकर्ता सक्रियता दिखा पाए और दलितों को एकजुट करने में कामयाब हो सके। पदाधिकारी इस सूची को तैयार करने में जुटे हुए हैं। दो दिन से बसपा पदाधिकारियों की बैठकें की जा रहीं हैं। इन पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं से दलित संगठनों को छिटकने न देने और लगातार संपर्क में रहने के भी निर्देश दिए गए हैं। बसपा जिलाध्यक्ष जनेश्वर प्रसाद का कहना है कि दलितों के आंदोलन में बसपा पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता शामिल हुए हैं। हालांकि बसपा कार्यकर्ताओं ने न तो कहीं हिंसा की है और न ही किसी अन्य कानून का उल्लंघन किया है। आंदोलन में शामिल होने वालों की अभी सूची नहीं बनी है। बैठकें लगातार की जा रहीं हैं।
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