फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

निकाय चुनाव से होगी विधायकों की अग्रिपरीक्षा

विज्ञापन
विज्ञापन
सहारनपुर। विधानसभा चुनाव के छह महीने बाद हो रहे निकाय चुनाव में मौजूदा विधायकों की भी अग्निपरीक्षा होनी है। कारण, निकाय चुनाव को लेकर राजनीतिक दल ऐड़ी चोटी का जोर लगाने में पीछे नहीं है। ऐसे में यह साफ है कि दिग्गज नेताओं के साथ विधायकों को अपनी विधानसभा के निकायों में भी खुद के वर्चस्व को बचाने की चुनौती होगी। फिलहाल विधानसभा चुनाव में शिकस्त खाने वाले निकाय चुनाव के जरिए अपनी खोई जमीन की मजबूती दिखाना चाहेंगे। ऐसे में वर्चस्व से जुड़ी निकाय चुनाव की जंग हर स्तर पर जनप्रतिनिधियों के दावों की पोल खोलेगी। सहारनपुर की सात विधानसभा सीट के चुनाव में चार पर भाजपा, दो पर कांग्रेस और एक पर सपा ने जीत हासिल की थी। हालांकि छह महीने पहले हुए चुनाव में सपा और कांग्रेस गठबंधन था, मगर इस बार यह भी आमने सामने हैं। सहारनपुर में 11 निकायों में चुनाव हो रहे हैं और सबसे बड़ी बात यह है कि राजनीतिक दल इस बार निकायों में पूरे दमखम के साथ चुनाव मैदान में उतरे हैं। बसपा और सपा ने भी सिंबल पर प्रत्याशी मैदान में उतारकर मतदाताओं के मूड भांपने में जुटी है। ऐसे में मतदाताओं के रुझान से आगामी लोकसभा चुनाव के लिए राजनीतिक दल अपनी कमर कसेंगे।
विज्ञापन

------------------------------
शहर और देहात से जुड़ा है नगर निगम
पहली बार हो रहे नगर निगम के चुनाव में शहर सीट के अलावा देहात क्षेत्र का काफी हिस्सा शामिल है। दोनों ही सीट पर विधानसभा चुनाव में गठबंधन को जीत मिली थी। शहर में सपा के संजय गर्ग और देहात में कांग्रेस के मसूद अख्तर विधायक बने थे। ऐसे में इन दोनों विधायकों के सामने खुद को साबित करने चुनौती होगी। उधर, भाजपा की परंपरागत सीट माने जाने वाली शहर सीट पर मिली शिकस्त से पार्टी इस चुनाव से बदला लेना चाहेगी। देहात सीट पर पिछले काफी समय से बसपा फतह हासिल करती थी। बसपा भी नगर निगम में कड़ी टक्कर में है। चतुष्कोणीय मुकाबले के दौरान नगर निगम चुनाव का मुकाबला रोचक होने की उम्मीद है।
-------------------------
गंगोह विधानसभा में है चार निकाय
सहारनपुर की सियासी राजधानी माने जाने वाली गंगोह विधानसभा में तीन नगर पंचायत और एक नगर पालिका शामिल है। गंगोह नगर पालिका, नानौता, तीतरों और अंबेहटा नगर पंचायत इसमें शामिल है। यहां भाजपा के प्रदीप चौधरी चुनाव जीते हैं और इससे पहले कांग्रेस से वे विधायक थे। पिछले चुनाव में यहां से सपा से इंद्रसेन, कांग्रेस से नोमान मसूद और बसपा से महिपाल माजरा चुनाव में लड़े थे। इन चारों निकायों पर हार जीत से एक बार फिर राजनीतिक दलों की जमीन की मजबूती सामने आएगी।
विज्ञापन

------------------------
रामपुर मनिहारान में भी रस्साकशी
रामपुर मनिहारान नगर पंचायत को लेकर राजनीतिक दलों के बीच खूब रस्साकशी है। यहां से भाजपा के देवेन्द्र निम चुनाव जीते हैं। दो बार से विधायक रहे रविन्द्र मोल्हू बेहद कम अंतर से हार गए थे, ऐसे में नगर पंचायत पर बसपा अपनी हार का बदला लेना चाहेगी। इसके अलावा गठबंधन से विश्वदयाल चुनाव लड़े थे, मगर विधानसभा चुनाव के बाद ही वे बसपा में शामिल हो गए थे। फिलहाल कांग्रेस और सपा भी यहां ऐडी चोटी का जोर लगा रही है।
------------------------
तीन निकायों से जुड़ी नकुड़ की प्रतिष्ठा
विधानसभा चुनाव में बेहद कांटे के मुकाबले वाले नकुड़ विधानसभा में नकुड़ और सरसावा नगर पालिका के अलावा चिलकाना नगर पंचायत भी है। यहां से भाजपा से चुनाव जीत कर चौथी बार विधायक बने डा. धर्म सिंह सैनी को सरकार में मंत्री पद की सौगात मिली है। उधर, कांग्रेस के प्रदेश उपाध्यक्ष इमरान मसूद काफी कम अंतर से चुुनाव हारे थे। बसपा से नवीन चौधरी चुनाव लड़े, मगर अब वे कांग्रेस में हैं। प्रदेश सरकार में मंत्री के सामने खुद के वजूद को बचाए रखने की चुनौती है, जबकि कांग्रेस और बसपा अपनी हार का बदला लेना चाहेगी। सपा भी यहां पूरे दम खम के साथ मैदान में है।

सियासी दलों के लिए खास होगा देवबंद
इस्लामिक तालिम के सबसे बड़े मरकज के चलते दुनियाभर में पहचान बनाने वाले देवबंद से भी राजनीतिक दलों की प्रतिष्ठा जुडी है। इस चुनाव में भाजपा लहर में ब्रिजेश सिंह विधायक बने हैं। यहां से सपा से माविया अली को हार का सामना करना पड़ा, जबकि उनकी पत्नी निवर्तमान चेयरमैन हैं। बसपा भी यहां शिकस्त खाए हुए हैं। सबसे अहम बात यह है कि कांग्रेस ने देवबंद में प्रत्याशी नहीं उतारा है। ऐसे में भाजपा के सामने छह महीने पुरानी कहानी दोहराने की चुनौती है तो बसपा और सपा हर हाल में अपनी उस हार को भुलाना चाहेंगे।
--------------------------
बेहट पर भी है राजनीतिक दलों की नजर
बेहट नगर पंचायत पर इस बार कांग्रेस के नरेश सैनी चुनाव जीते हैं और भाजपा के महावीर राणा व बसपा के हाजी मोहम्मद इकबाल शिकस्त खाए हुए हैं। ऐसे में इस नगर पंचायत में कांग्रेस अपनी जीत को दोहराना चाहेगी। भाजपा और बसपा यहां अपने हार को भुलाना चाहेगी। सपा भी इस नगर पंचायत में जीत के साथ अपनी ताकत का अहसास कराना चाहेगी।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें