सहारनपुर। सुप्रीम कोर्ट द्वारा निजता को मौलिक अधिकार के बारे में दिए गए निर्णय का अधिवक्ताओं एवं जनप्रतिनिधियों ने स्वागत किया है। लोगों का कहना है कि सरकारी सुविधाओं के लिए व्यक्ति की निजता को सार्वजनिक नहीं किया जाना चाहिए। आधार एवं अन्य निजता के प्रमाण से जानकारियों का भी सार्वजनिक नहीं होना चाहिए।
निजी जानकारी को कोई नहीं ले सकेगा
सहारनपुर अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष अखिलेश अग्रवाल का कहना है क सुप्रीम कोर्ट का निर्णय ऐतिहासिक है। नागरिकों की निजता को सरकार या फिर व्यक्ति का विरोधी भी प्राप्त नहीं सकेगा। इस निर्णय से नागरिक अपने जीवन को स्वतंत्रता पूर्वक जी सकेंगे।
सरकारी, गैर सरकारी एजेंसियों की मनमानी समाप्त हो जाएगी
वरिष्ठ अधिवक्ता गय्यूर-ए-आलम का कहना है कि सर्वोच्च न्यायालय के फैसले का तहेदिल से स्वागत करते हैं। इस निर्णय से नागरिकों को स्वतंत्र जीवन और अधिक पुख्ता हुआ है। नागरिक की स्वतंत्रता के अधिकारों में अतिक्रमण करने वाली सरकारी एवं गैर सरकारी एजेंसियों की मनमानी समाप्त हो जाएगी।
निजी जानकारी नहीं होगी सार्वजनिक
कलक्ट्रेट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष अशोक पंवार का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट ने निजता को मौलिक अधिकार का निर्णय देकर लोगों की स्वतंत्रता को कायम रखा है। आधार कार्ड, पेन कार्ड एवं अन्य अभिलेखों को हर जगह मांगा जा रहा है। चाहे फोन हो, बैंक खाता हो यहां तक कि ट्रेन का टिकट में भी अब आधार कार्ड जरूरी कर दिया गया। जबकि इसमें सबकुछ निजी जानकारी होती है। इसके काफी हद तक राहत मिलेगी। व्यक्ति की निजी जानकारी अब सार्वजनिक नहीं होगी।
सरकार ने आधार के लिए कानून बनाया
सांसद राघव लखनपाल शर्मा का कहना है कि निजता के मौलिक अधिकार का निर्णय बहुत अच्छा है। किसी की निजता उसका व्यक्तिगत अधिकार है। उसे सार्वजनिक नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि सरकार ने भी निजता को ध्यान में रखते हुए कदम उठाए हैं। आधार कार्ड के लिए भी सरकार ने कानून लाने का काम किया। जिससे निजता के अधिकार को बचाया जा सके। जो भी डाटा लिया गया है उसका प्रयोग उसी कार्य के लिए प्रयोग हो, जिसके लिए लिया गया है। बायोमैट्रिक सुविधा दी जा रही है वह सुरक्षा की दृष्टि के लिए जरूरी है। लेकिन अपनी आय को टैक्स बचाने के लिए सरकार से छुपाना गलत है। इसके लिए आधार, पेन को लिंक किया जाना जरूरी है।