सहारनपुर जनपद में खतरनाक रूप से फैल रही टीबी की जानलेवा बीमारी के बारे में स्वास्थ्य विभाग द्वारा लगातार जागरूकता अभियान चलाने के दावे हवा-हवाई साबित हो रहे हैं। पिछले एक साल में इस रोग से 187 मरीज दम तोड़ चुके है।
ग्रामीणों क्षेत्रों में टीबी का वायरस तेजी से लोगों को अपना शिकार बना रहा है। इसके खतरनाक रूप एमडीआर के सर्वाधिक मरीज की संख्या स्वयं गवाही दे रही है। इसके बावजूद स्वास्थ्य विभाग गहरी नींद में सोया है।
सरकार की ओर से सामान्य टीबी के मरीजों पर करीब 30 हजार रुपये, जबकि गंभीर एमडीआर रोगियों के लिए करीब तीन लाख रुपये तक के निशुल्क उपचार का प्रावधान है। जनपद में एमडीआर के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ी है।
एमडीआर को मल्टी ड्रग रजिस्टेंट कहा जाता है। इसमें मरीज पर सामान्य दवाइयां बेअसर हो जाती हैं। इसके लिए विशेष जांच और दवाईयों की व्यवस्था है। विभिन्न क्षेत्रों में टीबी के उपचार के लिए अलग से यूनिट बनाई गई है।
लेकिन उसके बावजूद भी टीबी के मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। 2016 के आंकड़ों पर नजर दौडाए तो सहारनपुर में इस लाइलाज बीमारी से 187 मरीज दम तोड़ चुके है।
वहीं 119 मरीजों में एमडीआर टीबी पायी गई। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी इस बीमारी पर अंकुश लगाने के बजाय जागरूकता का अभाव बताकर अपना पल्ला झाड़ रहे है।
गंगोह में स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों पर नजर डालें तो गंगोह क्षेत्र में स्थिति बेहद भयावह नजर आ रही है। यहां करीब 45 से 50 टीबी के मरीज प्रति माह उपचार के लिए आ रहे हैं।
बुखार के दृष्टिगत जनपद के सर्वाधिक संवेदनशील गांव कुंडाकलां में तो एक परिवार के तीन लोगों सहित सर्वाधिक चार मरीजों में एमडीआर पाजिटिव पाया गया है।
इसके अलावा धानवा में दो, बहलोलपुर में दो, खानपुर में दो, तीतरों में दो, गंगोह में दो, मनोहरा में दो, बुडढाखेडा में दो एवं खडलाना, डूभर किशनपुर, कलसी, बल्लामजरा, मोहनुपरा, ततारपुर कलां, मानपुर थली, पापडी, लखनौती ढलावली और जेहरा में एक-एक मरीज में टीबी का खतरनाक रूप एमडीआर पाजिटिव पाया गया है। सभी मरीजों का सीएचसी में तैनात विशेषज्ञों की देखरेख में उपचार चल रहा है।
सीएचसी प्रभारी डा. अनवर अंसारी ने मुताबिक गत वर्ष टीबी के करीब 600 मरीजों का सीएचसी में उपचार किया गया। उन्होंने कहा कि लोगों में भी इस बीमारी के प्रति जागरूकता का बेहद अभाव है। इसीलिए यह बीमारी लगातार क्षेत्र में अपने पैर पसार रही है।
उन्होंने दावा करते हुए कहा कि समय-समय पर गांवों में जागरूकता कैम्प लगाकर लोगों को इसके प्रति जागरूक किया जाता है। इसलिए यहां इतने केस भी सामने आ रहे है।
इसके उलट गांव कुंडाकलां के ग्रामीणों मतलूब, इकबाल, राशिद आदि ने उनके दावें की पोल खोलते हुए कहा कि स्वास्थ्य विभाग ने टीबी के बारें में आज तक कोई शिविर गांव में नहीं लगाया है।